दक्षिण कोरिया में इलेक्शन से पहले शॉर्ट सेलिंग में रोक – क्या भारत में भी ऐसा करना चाहिए?

By | 8 November 2023

शॉर्ट सेलिंग मार्केट गिरने के प्रमुख कारणों में से एक है। निवेशकों पहले शेयर को उधार लेकर सेल करते है और मार्केट गिरने के बाद कम प्राइस पर बाय करके लौटा देते है, जिससे बड़े बड़े प्रॉफिट कमा लेते है। शॉर्ट सेलिंग गिरे हुए मार्केट को और नीचे की तरफ दाखिल कर देते है। इसी को देखते हुए दक्षिण कोरिया सरकार ने इस हपते शॉर्ट सेलिंग पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसी पर सोशल मीडिया पर बहुत बहस चल रहा है। भारत में भी अगले साल लोकशोभा इलेक्शन है और इसे देखते हुए सेबी भी इस तरह का फैसला उठा सकता है।

शॉर्ट सेलिंग क्या है?

short selling

अगर आप शॉर्ट सेलिंग के बारे में नहीं जानते है तो चलिए आज हम आपको शॉर्ट सेलिंग से रूबरू करवा देते है। शॉर्ट सेलिंग का मतलब होते है पहले शेयर को बेचकर उसके बाद खरीदना। मतलब ऐसा है कि कोई भी ब्रोकर के पास कंपनी के स्टोक रहते है जो शॉर्ट सेलिंग में वे आपके जगह सेल कर देते है। यानी कि आपको शेयर उधार में दिया जाता है। और उसे बाद में आपको buy करके लौटाना पड़ता है।

इसका फायदा ज्यादातर संस्थागत निवेशक लेते है। उनको जब बाजार गिरने कि संभावना देखते है वे उधर पर स्टॉक को पहले ही सेल कर देते है और बाज़ार गिरने के बाद कम प्राइस में buy करके लौटा देते है। इसे शॉर्ट सेलिंग इसीलिए कहा जाता है क्युकी बेचने वाले ट्रेडर या निवेशकों के पास स्टॉक मौजूद नहीं रहते है।

दक्षिण कोरिया के मार्केट रेगुलेटरी ने क्या फैसला लिया?

Financial Supervisory Service(FSS) ने कोस्पी200 इंडेक्स और कोस्पी 150 इंडेक्स के शेयरों में नए शॉर्ट सेलिंग पोजिशन बनाने पर रोक लगाकर रखी है। उनका कहना है कि यह रोक नए साल 2024 के जून तक रहेगा। शेयर मार्केट रेगुलेटरी के कहना है है कि यह फैसला रिटेल निवेशकों के हित में लिया गया है। कोरिया में शॉर्ट सेलिंग अवैध है और कोई संस्थागत निवेशक यह कर रहे थे।

कोरिया के मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना

एक्सपर्ट्स का कहना है है कि रेगुलेटरी के यह फैसला बेबुनियादी है। यह फैसला राजनीति से प्रभाभित है। इसकी वजह यह है कि कोरिया में रिटेल निवेशक बहुत ज्यादा ताकतवर है। मीडिया के रिपोर्ट्स के मुताबिक रिटेल्स निवेशक शॉर्ट सेलिंग पर रोक लगाने की मांग कर रहे थे। ।

क्या भारत में भी ले सकते है फैसला?

अब तक बाजार के कोई फेस को देखने के बाद यह अनुमान लगाया जा सकता है कि भारत में रोक लगने कि संभभना बहुत ही कम है। भारत में तो मार्च 2020 कॉविड में भी शॉर्ट सेलिंग पर रोक नही लगे थे। हालाकि कि बीच बीच में थोड़े समय के इस पर रोक लगाई गए थे। शॉर्ट सेलिंग के विरोध करते वाले लोगो का कहना है कि इससे नेचरल प्राइस डिस्कवरी में दिक्कत आती है और लिक्विडिटी में भी प्रभाव पड़ते है।

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