Children Day Essay in Hindi | बाल दिवस पर निबंध

Children Day Essay in Hindi | बाल दिवस पर निबंध

children day essay hindi

प्रस्तावना :

आज की युवा पीढ़ी ही हमारे देश के भविष्य कहलाते हैं। इसलिए एक सभ्य समाज के निर्माण में बच्चों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। आगे आने वाले समय में उनके द्वारा किए गए कार्य एवं निभाई जाने वाली भूमिका किसी भी समाज और देश के प्रति बेहद जरूरी होती है।बच्चों को एक सभ्य इंसान बनाने पर इसका सीधा प्रभाव हमारे देश की आर्थिक, सामाजिक और धार्मिक स्थल पर देखने को मिलता है। देश को एक सुंदर स्वरूप प्रदान करने के लिए इसकी अर्थव्यवस्था में विभिन्न प्रकार के बदलाव किए जाते हैं जो कई बड़े बड़े ऑफिसर, मंत्रियों एवं व्यवसायियों द्वारा ही संभव हो सकते हैं। ऐसे में यदि बच्चों का भविष्य उज्जवल रहा तो हमारे देश के स्वरूप में बहुत बड़ा परिवर्तन आएगा एवं यह तरक्की की ओर जाएगा।

14 नवंबर के दिन बाल दिवस मनाने का प्रमुख कारण :

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि हमारे देश में कई प्रधानमंत्री अलग-अलग समय पर रहे हैं। लेकिन यदि बात करें पंडित जवाहरलाल नेहरु की तो अपने समय में उन्होंने देश के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए लेकिन उनके अंदर की खूबी यह थी कि वह बच्चों से बेहद प्यार करते थे। बाल दिवस का नाम सुनते ही हमारे हृदय में बच्चों के प्रति लगाव स्नेह एवं करुणा की भावना आ जाता है और नेहरू जी को हमेशा से बच्चों से बेहद लगाव था।

जैसा कि हम सभी जानते हैं जवाहरलाल नेहरू का जन्म 14 नवंबर 1889 ईसवी को हुआ था। उनका जन्म स्थान उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में था। जवाहरलाल नेहरू के जन्म दिवस के शुभ अवसर पर ही हम बाल दिवस मनाते आ रहे हैं। यही कारण है कि हर साल हम 14 नवंबर को उनके जन्मदिन के उपलक्ष्य को बाल दिवस के तौर पर मनाते हैं। यह दिवस 1956 से लेकर अब तक हम बड़े ही प्रेम भाव एवं उत्साह से मनाते हैं।

पंडित जी को चाचा नेहरू की मिली इस संज्ञा के विषय में कई किस्से प्रचलित है। इनमें से एक के अनुसार बच्चों के प्रति दोस्ताना रवैया रखने के कारण बच्चे इनको चाचा नेहरू कहते थे। आने किससे के अनुसार यह भी माना जाता है कि महात्मा गांधी के काफी करीब होने के कारण पंडित जवाहरलाल नेहरू को लोगों द्वारा उनके छोटे भाई होने पर चर्चा की संज्ञा मिल गई थी। दरअसल इसके पीछे का तर्क सिर्फ इतना है कि लोगों द्वारा महात्मा गांधी को बापू कहा जाता था और जवाहरलाल नेहरू महात्मा गांधी के भाई समान होने के कारण लोगों द्वारा उन्हें चाचा नेहरू कहा जाता था।

जवाहरलाल नेहरू का बच्चों के प्रति अगाध प्रेम :

नेहरू जी अपने बड़े राष्ट्रीय नेता होने पर भी किसी प्रकार की अभिमान नहीं रखते थे और वह बच्चों से बेहद लगाव रखते थे। बच्चों से अपने इसी लगाव के कारण अपने व्यस्त कार्यकाल में भी समय मिलने पर वह उनके साथ काफी समय बिताते थे। बच्चे भी इन्हें बहुत प्यार करते थे एवं प्यार से इन्हे चाचा नेहरू कह कर पुकारते थे।

पंडित नेहरू की विषय में एक कहानी बहुत अधिक चर्चित है। यह उस समय की बात है जब वह प्रधानमंत्री पद पर आसीन थे। बात दरअसल यह यह थी कि नेहरू जी के घर में काम करने वाली एक महिला अपने 2 महीने के बच्चे के साथ काम पर आई थी। काम में व्यस्त होने के कारण वह अपने बच्चे पर ज्यादा ध्यान नहीं दे पा रही थी। जिसके कारण उसका बच्चा भूख के कारण रो रहा था। जब नेहरू जी ने यह देखा तो वह उस बच्चे को चुप कराने लगे और तब तक उससे अपनी निगरानी में रखा जब तक कि उसकी मां ना आ गई। उनके इसी व्यवहार के कारण ही लोगों द्वारा उन्हें बच्चों के चाचा की संज्ञा दी गई थी।

पंडित जवाहरलाल नेहरू के बच्चों के प्रति अपार प्रेम और करुणा के भाव को देखते हुए ही उनके मृत्यु के बाद, उनकी जन्म जयंती 14 नवंबर के अवसर पर ही प्रत्येक वर्ष बाल दिवस यानी कि चिल्ड्रन डे मनाने का निश्चय किया गया था। इसका मुख्य कारण यह भी है कि इस दिन बाल दिवस मनाने के साथ-साथ बच्चों के भविष्य, मानसिक विकास, स्वास्थ्य एवं उनकी शिक्षा व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया जा सके। इन सभी समारोहों को मनाने का विशेष कारण यह भी है कि चाचा नेहरू के असली संदेश को हमेशा याद रखें।

बाल दिवस मनाने का उद्देश्य :

पंडित नेहरू बच्चों को किसी भी देश की वास्तविक शक्ति और समाज की जरूरी बुनियाद मानते थे। उनका मानना था कि यदि कोई देश प्रगति के शिखर पर ऊंची बुलंदियों ऊंची बुलंदियों पर चढ़ना चाहता है तो उसे सबसे पहले अपने देश के युवाओं को सही शिक्षा और रोजगार देना पड़ेगा जिससे देश के युवा देश कल्याण में अधिक से अधिक योगदान दे सकें। अपने अधिकतर भाषणों में लोगों को संबोधित करते हुए नेहरू जी हमेशा ही कहते थे कि हम जिस तरह हम अपने बच्चो का पालन-पोषण करेंगे वही इस बात का मात्रक होगा कि देश कितना अधिक उन्नति करेगा।

नेहरू जी को भारत के बच्चों में बहुत आशा और विश्वास था। उनका मानना था कि केवल बच्चे ही हैं जो कि “भेदभावों के बारे में सोचे एक साथ मिलकर आपस में रह सकते हैं।” उनका मानना था कि बच्चों को यदि शुरुआत से ही सही परवरिश दी जाए तो उनके लिए मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं होगा। वह देश के बच्चों को एक स्वतंत्र और धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र का नेतृत्व करते हुए देखना चाहते थे। उन्होंने अपने अधिकतर लेखों में भी इस बात का जिक्र करते हुए लिखा हैं कि, “आज के बच्चे ही कल का भारत बनाएंगे। जिस तरह से हम उनका पालन-पोषण करेंगे, वह देश का भविष्य तय करेगा।” जवाहरलाल नेहरू द्वारा कहे गए इन बातो एवं विचारों को वास्तविकता में लाने के उद्देश्य से ही बाल दिवस मनाया जाता है।

विद्यालयों में बाल दिवस का आयोजन :

बाल दिवस के अवसर पर नेहरू जी के बच्चों के प्रति इसी लगाव के सम्मान में प्रत्येक विद्यालय को बड़े ही खूबसूरत तरीके से सजाया जाता है एवं धूमधाम से बाल दिवस मनाने के लिए विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया जाता है। इस दिन स्कूली बच्चे बहुत खुश दिखाई देते हैं। वे सज-धज कर विद्यालय जाते हैं। विद्यालयों में बच्चों के लिए विशेष कार्यक्रम शिक्षकों द्वारा आयोजित किए जाते हैं। जो बच्चों में एक नई उत्साह एवं उमंग का संचार करता है। नेहरू जी शिक्षा के महत्व के बहुत मजबूत समर्थक थे। इस कारण इस दिन विभिन्न प्रकार के नृत्य, गान और नुक्कड़ नाटकों द्वारा शिक्षा के महत्व को आम लोगों को बताया जाता है।

इसके साथ ही साथ विद्यालय के शिक्षक भाषण देकर जवाहरलाल नेहरू के बच्चों के साथ प्रेम भाव एवं उनके कार्यों का भी व्याख्यान सुनाते हैं जिससे बच्चे और भी प्रेरित होते हैं। इन से प्रेरणा लेकर बच्चे बहुत कुछ सीखते हैं एवं भविष्य में उज्जवल चरित्र एवं व्यक्तित्व की कामना करते हैं। इसके बाद आगे बढ़कर वह बड़े-बड़े पदों पर आसीन होकर देश की सेवा कर देश को उन्नति के शिखर पर ले जाते हैं।

बाल दिवस के उपलक्ष्य में प्रतियोगिताओं का आयोजन :

बाल दिवस का यह कार्यक्रम केवल विद्यालयों में ही नहीं बल्कि कॉलेज में भी मनाया जाता है, जिसमें सुबह की शानदार असेंबली से लेकर डांस पार्टी तक शामिल हैं। विद्यालयों में तो बच्चे विभिन्न प्रकार के प्रतियोगिताओं में भाग लेते हैं लेकिन बात करें कॉलेज की तो यहां सभी विद्यार्थी बाल दिवस को बड़े ही जश्न की तरह मनाते हैं। इस दिन बच्चों के लिए एक विशेष प्रकार के बाल मेले का भी आयोजन किया जाता है। जो कि एक प्रकार की प्रदर्शनी होती है। बाल मेले में बच्चे अपने द्वारा बनाई हुई वस्तुओं की प्रदर्शनी लगाते हैं। बाल दिवस के उपलक्ष्य में सभी कक्षा के बच्चों को एक साथ बुलाकर बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है।

इसमें बच्चे अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं। नृत्य, गान, नाटक आदि भी प्रस्तुत किए जाते हैं। इस दिन के दौरान बच्चे आकर्षण का केंद्र होते हैं और कई स्कूल और कॉलेज इस दिन बच्चों को विशेष महसूस कराने के लिए अनेकों प्रकार की प्रतियोगिताएं और पार्टी का आयोजन करते हैं। घर जाते वक्त बच्चों को चॉकलेट भी देकर विदा किया जाता हैै। इससे बच्चे और अधिक उत्साह से इसमें भाग लेते हैं। इन प्रतियोगिताओं में शिक्षक तो शामिल होते ही हैं साथ ही साथ बच्चे भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं और इस दिवस को और भी यादगार बना देते हैं।

सभी विद्यालयों में नृत्य, संगीत, शायरी और भाषण प्रतियोगिता रखी जाती है। इसने कविता पाठ, खेलकूद संबंधित प्रतियोगिताएं एवं चित्रकला जैसे कलाकारी को भी प्रतियोगिता का हिस्सा बनाया जाता है। इतना ही नहीं इसके अलावा कई बार वाद विवाद प्रतियोगिता में भी बच्चे भाग लेते हैं। जिसमें समाज के विभिन्न पहलुओं का जिक्र होता है। इसमें बच्चों की मानसिकता के आधार पर ही विषय को चयनित किया जाता है। इन प्रतियोगिताओं में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कृत भी किया जाता है।

उपसंहार :

बाल दिवस हमारे बच्‍चों के लिए सुरक्षा और प्रेमपूर्ण वातावरण उपलब्‍ध करने का संदेश देता हैं। जिसमें उन्‍हें पर्याप्‍त और समान अवसर देना शामिल है। जिसके जरिए बच्चे जोगिया के चलकर युवा बनेंगे वह अपने राज्य और राष्ट्र की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे सकें। बाल दिवस का यह दिन हम सबके लिए एक अनुस्मारक की भांति कार्य करता है, जो हमे हमारे देश के भविष्य हमारे देश के बच्चों के कल्‍याण के हित एवं हमारी प्रतिबद्धता को याद दिलाता है। बाल दिवस का यह दिन ना केवल बच्चों अपितु माता पिता के लिए भी एक अनुस्मारक है कि यदि आप अपने बच्‍चों को अन्‍य के साथ सौभाग्‍यशाली चीजें बांटने का मूल्‍य सिखा सकें तो न केवल आपका बच्‍चा एक जिम्‍मेदार नागरिक बनेगा, बल्कि अन्‍य बच्‍चे की सहायता में हाथ बंटा सकेगा, जिससे हम अपने देश के बच्चों के लिए एक सुसमृद्ध समाज की स्थापना कर सकेंगे और चाचा नेहरू के मूल्‍यों को सही मायनों में अपना सके।

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