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Earthquake In Hindi | भूकंप पर निबंध

Earthquake In Hindi, Earthquake Essay Hindime, भूकंप क्या है, अर्थ परिभाषा,प्रकार, कारण, बचने का उपाय, सुरक्षा, होनेवाला नुकसान जाने इस आर्टिकल में

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Earthquake का अर्थ

Earthquake यानी कि भूकंप एक प्राकृतिक आपदा है जो सभी प्राकृतिक आपदाओं से सबसे विनाशकारी आपदा माना जाता है। इसके कारण मानव जीवन को अपार क्षति पहुंचती है। Earthquake का हिंदी अर्थ भूकंप होता है जो दो शब्दों से मिलकर बना है – भू और कंप। भू का अर्थ है धरती या पृथ्वी और कंप का अर्थ है हिलना यानी की साधारण भाषा में कहें तो पृथ्वी में होने वाले कंपन को ही Earthquake कहा जाता है। 

Earthquake की परिभाषा :

पृथ्वी के भूपटल पर अदैशिक या सदैशिक शक्तियों द्वारा उत्पन्न तनाव के अचानक मुक्त होने पर धरती की सतह का कांपना या हिलना ही भूकंप कहलाता है। भूकंप का प्रभाव अधिकतर अत्यंत विस्तृत क्षेत्रों में देखा जाता है, जो पहाड़ों तथा पर्वतों के नजदीक होता है। 

ज्यादातर क्षेत्रों में भूकंप के कम प्रभाव तथा कुछ विशेष क्षेत्रों में भयंकर त्रासदी भी देखी जाती है। भूपटल पर अचानक आने वाले भूकंप के प्रभाव से पृथ्वी पर जो उथल-पुथल या हल्का सा कंपन होता है उससे व्यापक स्तर पर तबाही होने की संभावना होती है।

Earthquake के प्रकार :

साधारणतः भूकंप दो प्रकार का है : प्राकृतिक कारणों से उत्पन्न होने वाला भूकंप और मानव गतिविधियों से आने वाला भूकंप।

  1. प्राकृतिक कारणों से उत्पन्न होने वाला भूकंप – यह भूकंप प्राकृतिक रुप या प्राकृतिक घटनाओं जैसे- भूपटल में हलचल या किसी प्रकार का  उथल-पुथल, ज्वालामुखी विस्फोट तथा चट्टान या दरारों के टूटने से आता है। 
  2. मानव गतिविधियों से आने वाला भूकंप – मानव गतिविधियों जैसे – विशाल गहरे कुएं में वज्य पदार्थ व कोई तरल पदार्थों का दोहन, तेल निकालने के लिए गहरे कुएं का खनन करना, जल संरक्षण के लिए विशाल बांधों का निर्माण करना तथा नाभिकीय विस्फोट जैसी भयंकर मानवीय गतिविधियों के कारण भी विनाशकारी भूकंप आता है। जैसे- महाराष्ट्र के कोयला क्षेत्र में 1967 में कृत्रिम जलाशय के निर्माण से आने वाला भूकंप।

Earthquake आने के कारण :

साधारण भाषा में कहें तो हमारी धरती 4 परतों inner core, outer core, mental व crust से मिलकर बनी है। यह परत लगभग 50 किलोमीटर चौड़ा है जो चार वर्गों में विभाजित है, यह टेक्टोनिक प्लेट्स कहलाती है। 

यह प्लेटें धरातल के नीचे घूमती रहती है और जब यह प्लेट्स बार-बार हिलती हुई किसी दूसरे प्लेट से टकराती है, तो प्लेट्स में दरारें पड़ने लगती हैं। ज्यादा टकराने के कारण प्लेट्स टूटने लगती हैं जिससे धरातल के नीचे का ऊर्जा ऊपर आकर दवाब बनाती है जिससे पृथ्वी में कंपन होता है, इस प्रकार भूकंप की स्थिति उत्पन्न होती है।

कुछ भूगोल शास्त्रियों का मानना है कि जब प्लेटें अपनी जगह से हिलती है तो एक प्लेट दूसरी प्लेट के नीचे आ जाती है या ऊपर चढ़ जाती है, जिससे  पृथ्वी में हलचल होता है जिसके उपरांत भूकंप आता है।

Earthquake की स्थिति :

जब पृथ्वी में अचानक कंपन होता है अर्थात भूकंप के समय धरातल कुछ समय के लिए हिलता है जिससे एक हल्का झटका- सा महसूस होता है।  जब भूकंप के दो झटके महसूस होते हैं तो दूसरा झटका पहले झटके से अधिक प्रभावकारी होता है। साधारणतः भूकंप कुछ सेकंड के लिए ही आता है लेकिन जब दूसरी बार भूकंप के झटके महसूस होता है तो वह करीब 1 मिनट से अधिक का भी हो सकता है।

Earthquake की शक्ति :

भूकंप से उत्पन्न धरती में कंपन का समय मिट्टी की स्थिति, इमारतों की ऊंचाई, अधिकेंद्र से दूरी तथा उस जगह के निर्माण में उपयोग की गई सामग्री पर निर्भर करता है। भूकंप की तीव्रता भूकंप आवर्ती पर निर्भर करती है। अगर भूकंप की आवर्ती ऊपर की ओर है तो कम झटका या प्रभाव महसूस किया जाता है और यदि नीचे की ओर है तो भूकंप से अधिक क्षेत्र प्रभावित होता है।

रिक्टर पैमाने पर 0 से 1.9 तक आने वाले भूकंप का पता केवल सिस्मोग्राफ से ही पता चलता है। इसके बाद 2 से 2.9 तक के भूकंप हल्के कंपन की स्थिति पैदा करते हैं। 3 से 3.9 तक के आने वाले भूकंप का एहसास हल्के कंपन से थोड़ा अधिक होता है। 4 से 4.9 के बीच के भूकंप में घर की खिड़कियों के टूट जाने तथा दीवारों पर टांगे फ्रेम के गिरने जैसे स्थिति पैदा करती है। वहीं रिक्टर स्केल पर 5 से 5.9 तक के भूकंप पानी पर घर के फर्नीचर भी हिल सकते हैं।

रिक्टर स्केल पर आए भूकंप की तीव्रता यदि 6 से 6.9 के बीच हो तो बड़ी-बड़ी इमारतों में दरारें आ जाती हैं एवं उसके ऊपर की मंजिल को भारी नुकसान पहुंच सकता है। 7 से 7.9 तक आने वाले भूकंप में इमारतें पूरी तरह से धंस जाती हैं एवं जमीन के अंदर की पाइप भी फट सकती है। रिक्टर स्केल पर यदि भूकंप की तीव्रता 8 से 8.9 तक हो तो इमारतों के अलावा कई बड़े-बड़े बांध भी गिर सकते हैं।

सबसे अंतिम में रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 9 और उससे अधिक तक जा सकती है, जो पूरी तबाही का संकेत देती है। इस स्थिति में समुद्र के किनारे सुनामी आने की भी संभावना काफी तीव्र होती है। अब तक जितने भी भूकंप की स्थिति पैदा हुई है इसकी अंतिम तीव्रता 8.8 से 8.9 के बीच मापी गई है। भारत में 12 जून, 1897 को शिलांग प्लेट में जो भूकंप आई थी, उसकी तीव्रता 8.7 मापी गई थी।

Earthquake का तीव्रता मापन यंत्र :

भूकंप की तीव्रता सिस्मोग्राफ या रिक्टर स्केल से मापा जाता है। भूकंप को मापने के लिए रिक्टर स्केल पर 1 से 9 तक लाइन बने होते हैं। रिक्टर स्केल के केंद्र अर्थात एपीसेंटर से भूकंप की तीव्रता या भूगर्भीय ऊर्जा की तीव्रता को मापा जाता है। रिक्टर स्केल से भूकंप की तीव्रता का अंदाजा लगाया जाता है।

Earthquake से सुरक्षा :

जिन क्षेत्रों में भूकंप की संभावना बहुत अधिक रहती है, वहां जानमाल की क्षति होने से बचाने के लिए पहले से ही सुरक्षा के तरीके अपनाए जाते हैं। भूकंप से सुरक्षा प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित उपाय को अपनाया जा सकता है –

  • भूकंप से बचाव के लिए आपातकालीन व्यवस्था तथा इमरजेंसी कीट पहले से बना कर रख लें। 
  • भूकंप आने से पहले किसी भी तरह की जानकारी मिलने पर आवश्यक एवं जरूरी सामानों को रखने की पूरी व्यवस्था कर लें। 
  • जब भूकंप आए तो किसी मजबूत टेबल या मेज के नीचे बैठ जाएं और हाथ से चेहरे को ढ़क लें।
  • जब भूकंप आए तो घर के अंदर ही रहें परंतु खिड़की, दरवाजे तथा दीवारों से दूर ही रहें।
  • भूकंप के समय अगर आप घर से बाहर हैं, तो ऊंची इमारतों तथा किसी खम्भें के नजदीक न रहें।
  • अगर आप भूकंप के कारण मलबे के नीचे दब गए हैं, तो अपनी मौजूदगी जताएं और अपने चेहरे को ढ़क कर ही रखें।

भारत के प्रमुख भूकंपीय क्षेत्र :

भारत के प्रमुख भूकंपीय क्षेत्रों को चार जोनों में बांटा गया है, जो निम्नलिखित है :-

  • सीस्मिक जोन 5 – गुजरात का कच्छ, अंडमान-निकोबार व जम्मू कश्मीर इत्यादि।
  • सीस्मिक जोन 4 – दिल्ली, एनसीआर, बिहार, हिमाचल प्रदेश, पश्चिमी तट से सटे महाराष्ट्र और राजस्थान, यूपी इत्यादि।
  • सीस्मिक जोन 3 – केरल, गोवा, लक्षदीप, गुजरात एवं पश्चिम बंगाल इत्यादि।
  • सीस्मिक जोन 2 – बाकी बचे सभी अन्य क्षेत्र।

Earthquake से होने वाले नुकसान :

Earthquake से बहुत अधिक नुकसान का सामना करना पड़ता है। इसके फलस्वरूप होने वाले नुकसान को निम्नलिखित रुप से देखा जा सकता है –

  • भूकंप आने से अपार धन जन की क्षति होती है।
  • भूकंप से बड़ी-बड़ी तथा ऊंची इमारतें गिर जाती है तथा बड़े-बड़े कल कारखानों में भीषण आग लग जाती है।
  • गहरे तथा विशाल महासागरों में भूकंप के प्रभाव से सुनामी की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
  • इसके अलावा भू-स्खलन की क्रिया भी तेज हो जाती है।

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FAQs

Q.Earthquake कितने प्रकार के होते हैं?

Ans : Earthquake मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं जिसमें प्राकृतिक कारणों से उत्पन्न भूकंप एवं मानवीय कारणों से उत्पन्न भूकंप शामिल हैं।

Q.भूकंप लेखी क्या होता है?

Ans : जिस यंत्र से Earthquake के परिमाण का मापन किया जाता है, उसे भूकंप लेखी कहा जाता है।

Q.Earthquake के समय कौन सी तरंगे उत्पन्न होती है?

Ans : भूकंप के समय प्राथमिक तरंग, द्वितीय तरंग और एल तरंग उत्पन्न होती है।

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Shambhavi Mishra

यह कानपुर, उत्तर प्रदेश की निवासी हैं। इन्होंने हिंदी साहित्य में परास्नातक किया हुआ है। इन्हें शिक्षा, बिज़नस से संबंधित विषयों पर काफी अनुभव है और इन्ही विषयों पर लेख लिखती है। Follow Her On Facebook - Click Here

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