Skip to content

सिद्धार्थ गौतम बुध्द जीवन परिचय एवम जयंती | Gautam Buddha History and Jayanti In Hindi

गौतम बुद्ध की जयंती 2022,सिद्धार्थ गौतम बुध्द जीवन परिचय एवम जयंती, जन्म, स्वाभाव,वैवाहिक जीबन,शिक्ष,ज्ञान के पाप्ति, उपदेश, मृत्यु | Gautam Buddha History and Jayanti, In Hindi

gautama buddha ka jivan parichay

गौतम बुद्ध का जन्म

बौद्ध धर्म का प्रचलन करने वाले बौद्ध धर्म प्रचारक गौतम बुद्ध क्षत्रिय शाक्य वंश के राजकुमार थे। गौतम बुद्ध का जन्म लगभग ढाई हजार साल पहले राजा शुद्धोधन के महल में हुआ था। पुत्र की प्राप्ति से महाराज की इच्छा पूर्ण हो गई जिसकी वजह से महाराजा एवं महारानी ने गौतम बुद्ध का नाम सिद्धार्थ रखा। उनकी माता महामाया देवी कोली वंश से सम्बंधित थीं, जिसका अनुसरण परंपरागत कथाओं से मिलता है। उनकी माता का निधन सिद्धार्थ के जन्म के 7 दिन के पश्चात ही हो गया था। इसकी वजह से सिद्धार्थ की मां की बहन जिनका नाम गौतमी था उन्होंने ही बचपन से सिद्धार्थ को पाला। इसके बाद ही सिद्धार्थ का नाम गौतम भी पड़ गया।

गौतम बुद्ध का स्वभाव

गौतम बुद्ध बचपन से ही अत्यंत दयालु प्रवृती के व्यक्ति थे। पुरानी कथाओं के अनुसार गौतम बुद्ध को काफी दुख हुआ था जब उनके सौतेले भाई देवव्रत ने एक पक्षी को अपने वाण से घायल कर दिया था। उस घटना के बाद गौतम बुद्ध ने उस पक्षी की सेवा की और उसे एक नया जीवन दिया था। वे अपने स्वभाव के अत्यंत साधारण एवं दयालु थे। क्योंकि वे दूसरे के दुख मे दुःखी हो जाय करते थे। वे अपने प्रजा कब कस्ट को सेहन नही कर पाते थे। उनका यह स्वभाव उनके पिता राजा शुद्धोधन को अच्छा नही लगता था। वह कभी नहीं चाहते थे कि सिद्धार्थ उनके राजपाट को छोड़कर गृह त्याग कर दे। लेकिन सिद्धार्थ अपने विचारों एवं भावनाओं के कारण राजा के कोशिशों के बावजूद अपने पारिवारिक मोह माया का त्याग कर के सत्य की खोज में निकल गए।

गौतम बुद्ध का वैवाहिक जीवन

सिद्धार्थ की कुंडली को देखकर राज ज्योतिषी ने यह भविष्यवाणी की कि बड़ा होकर सिद्धार्थ या तो एक बहुत ही बड़ा चक्रवर्ती राजा बनेगा या फिर एक बहुत ही महान संत। राज ज्योतिषी की यह संत वाली बात सुनकर महाराजा चिंता में पड़ गए। सिद्धार्थ के स्वाभाव की बात करें तो वह बचपन से ही गंभीर और करुणायुक्त स्वभाव के ही थे। जब वह अपने बाल्यावस्था से युवावस्था में आए इसके बाद भी उनके स्वभाव में परिवर्तन नहीं हुआ।

एक भविष्यवाणी जो सिद्धार्थ के लिए की गई थी, जब राजा शुद्धोधन को इसके बारे में पता चला तो वे काफी गंभीर और सतर्क हो गए। उन्होंने उस भविष्यवाणी को पलटने के लिए बहुत प्रयास किया क्योंकि वे चाहते थे कि सिद्धार्थ उनके राज्य सिंहासन को संभाले और एक पुत्र का कर्त्तव्य पूरा करे। इन सभी कारणों के कारण उन्हें राज्यमहल से बाहर निकलने नहीं दिया जाता था । उन्हें महल में ही सारी सुख सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती थी। परंतु सिद्धार्थ का मन इन सभी अडम्बनों से कही दूर था। इसके बाद सिद्धार्थ के पिता ने सोचा कि सिद्धार्थ का विवाह करवा देने पर वह कभी त्याग अथवा बैरागी के जीवन को अपनाना नहीं चाहेगा बल्कि राज सुख के जीवन में बंध कर रह जाएगा। यही सोच कर उन्होंने गौतम बुद्ध की शादी यशोधरा से करवा दी। सिद्धार्थ का विवाह दण्डपाणि शाक्य की कन्या यशोधरा के साथ 16 वर्ष की आयु में हुआ था। आगे चलकर उनकी पत्नी यशोधरा और पुत्र राहुल बुद्ध के भिक्षुक बन गए थे। यशोधरा काफी सुंदर एवं राज घराने की कन्या थी।

गौतम बुद्ध की शिक्षा-दीक्षा

राज परिवार से होने के कारण राजा शुद्धोधन चाहते थे कि सिद्धार्थ को अच्छी शिक्षा मिले और इसीलिए सिद्धार्थ ने विश्वामित्र से शिक्षा ग्रहण किया था। सिद्धार्थ बचपन से ही घुड़सवारी के शौकीन थे और रथ हाँकने और धनुष वान चलाने में उनका मुकाबला करने वाला दूसरा और कोई नहीं था। गौतम बुद्ध को वेद और उपनिषदों की शिक्षा के साथ साथ युद्ध कौशल में भी निपुण बनाया गया था। शिक्षा की बात करें तो वह काफी बुद्धिमान और हुनरमंद थे।

गौतम बुद्ध को बौद्ध ज्ञान की प्राप्ति

गौतम बुद्ध को ज्ञान के प्रप्ति वैशाखी पूर्णिमा को बौद्ध गया में हुई थी। इस घटना के बाद उन्हें गौतम बुद्ध के नाम से जाना गया। गौतम बुद्ध ने एक विशेष सुरक्षा के नीचे ज्ञान की प्राप्ति की और यही कारण था कि वे जिस वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त किया उसे बोधिवृक्ष के नाम से जाना जाने लगा। बुद्ध ने जिस स्थान पर ज्ञान की प्राप्ति किया उस स्थान को बोध गया कहा जाने लगा।

गौतम बुद्ध का धर्म-चक्र-प्रवर्तन

ध्यान लगाने के पश्चात गौतम बुद्ध के जीवन में एक नया मोड़ आया। उन्हें यह मालूम हुआ कि सत्य हर मनुष्य के साथ है और उसे बाहर से ढूँढना निराधार है। उसके बाद उन्होंने पाली भाषा मे बौद्ध धर्म का प्रचार प्रसार किया। देखते ही देखते बौद्ध धर्म की लोकप्रियता लोगों के बीच बढ़ गई। वहीं से इस संग ने पूरी दुनिया मे बौद्ध धर्म के उद्देश्यों को फैलाया।

गौतम बुद्ध के उपदेश

ज्ञान की प्राप्ति के पश्चात गौतम बुद्ध ने जनता में बौद्ध धर्म की प्रसिद्धि को फैलाने एवं उसके प्रचार प्रसार के दौरान कई महत्वपूर्ण उपदेश दिए, जो निम्नलिखित हैं –

  • अहिंसा
  • सत्य
  • अस्तेय (चोरी न करना)
  • अपरिग्रह (किसी प्रकार कि संपत्ति को संयोग के न रखना)
  • मध सेवन न करना
  • असमय भोजन न करना
  • सुखप्रद बिस्तर पर नहीं सोना
  • धन संचय न करना
  • स्त्रियो से दूर रहना
  • नृत्य-गान आदि से दूर रहना।

बौद्ध धर्म का प्रचार प्रसार

गौतम बुद्ध ने अपना सबसे पहला उपदेश सारनाथ में दिया, जहां पर 5 ब्राह्मण उनके सबसे पहले शिष्य बने। इसके उपरांत उन्होंने अपने बौद्ध धर्म का प्रचार प्रसार करना आरंभ किया। वे अन्य ऋतुओं में एक से दूसरे स्थान तक घूम कर अपने धर्म का प्रचार करते और वर्षा ऋतु के दौरान विभिन्न नगरों में आराम करते थे। उनके प्रचार का कार्य विवरण बौद्धिक साहित्य में प्राप्त होता है जो बहुत ही रोचक है।

गौतम बुद्ध अपने ब्राह्मण अनुयायियों के साथ सारनाथ से वाराणसी गए। वहाँ उन्होंने धनी पुत्र यश नामक व्यक्ति को अपना शिष्य बनाया। इसके बाद वे मगध की राजधानी से राजगृह पहुँचे जहाँ पर उन्होंने द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ वर्षाकाल गुज़ारे। उनके निवास के लिए मगध के राजा बिम्बिसार ने विलुवान नामक विहार बनाया। वहाँ गौतम बुद्ध ने अनेक प्रषिद्ध ब्राह्मणों के साथ ससात्र किया जिसके बाद वे सभी विद्वान उनके अनुयायी बन गए।
इनमें से कुछ प्रमुख विद्वान मोद्रलेययन उपाली, सारी पुत्र और उभय आदि प्रमुख्य है। उसके बाद गौतम बुद्ध ने नालंदा, गया ,पाटलिपुत्र आदि स्थानों की भी यात्रा किये और उस दौरान उन्होंने कई लोगों को अपना शिष्य बनाया। कई लोगो को अपने मत में लिया।

अनेक वीर राजा बुद्ध के अनुयायी बन गए। यह धर्म भारत से बाहर तेज़ी से फैला और आगे चल कर चीन, जापान आदि देशों का मुख्य धर्म बन गया। उनके दिए गए उपदेश लोग श्रद्धा से मानते और इसका अनुसरण करते थे। उनकी मृत्यु के 400 साल बाद भी लोग उन्हें भगवान के रूप में पूजते थे।

गौतम बुद्ध के अष्टांगिक मार्ग

गौतम बुद्ध का जीवन वास्तव में अधिक प्रेरणा देने वाला है। उनका कार्य सदैव मानव जाति के मुक्ति का एक मार्ग ढूंढने में अपने जीवन को लगा देना था। उसके लिए उन्होंने अपने राज सुख और भोग का त्याग कर दिया और अनेकों शारीरिक परेशानियों का सामना किया। उनका पूरा जीवन सत्य की खोज में ही गुज़र गया। जिसके बाद उन्होंने बिहार में बोधिवृक्ष के नीचे ज्ञान की प्राप्ति की।

महात्मा बुद्ध के अनुसार संसार दुखों से भरा पड़ा है और उन्होंने उन दुख को उत्पन्न होने के कारण को भी बताया है। उन दुखों के निवारण के लिए गौतम बुद्ध ने मर्ग को बताया है जिसे अष्टांगिग मार्ग के रूप में बताया गया है। वे अष्टांगिग मार्ग निम्न है-

  • सम्यक दृष्टि
  • सम्यक संकल्प
  • सम्यक वाणी
  • सम्यक कर्म
  • सम्यक आजीव
  • सम्यक व्यायाम
  • सम्यक स्मृति
  • सम्यक समाधि

गौतम बुद्ध की मृत्यु

गौतम बुद्ध की मृत्यु 80 साल की आयु में 483 ईस्वी पूर्व कुशीनारा में हुई थी। बौद्ध धर्म के अनुयायी इसे ‘महापरिनिर्वाण’ भी कहते है। बुद्धिजीवी और इतिहासकार उनकी मृत्यु के मत में एकमत नहीं है।

गौतम बुद्ध की जयंती 2022(बुद्ध पूर्णिमा)

गौतम बुद्ध के जन्म दिवस पर बुद्ध पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। गौतम बुद्ध जयंती या बैशाख की पूर्णिमा, हिंदी महीने के दूसरे मास में मनाई जाती है। इसी कारणवश इसे हंमतसुरी या फिर वेसक कहा जाता है। यह त्यौहार बोद्ध धर्म में बहुत प्रचलित है। बुद्ध पूर्णिमा को बौद्ध धर्म में आस्था रखने वाले लोग बड़ी धूम धाम से मनाते है, क्योंकि उन लोगो का यह प्रमुख त्यौहार है।

गौतम बुद्ध का जन्म बुद्ध पूर्णिमा के ही दिन हुआ था, इसी दिन उनको ज्ञान की प्राप्ति भी हुई थी और इसीलिए उनका महानिर्वाण हुआ था। ऐसा पहले किसी अन्य महापुरुष के साथ नहीं हुआ। इस दिन को बुद्ध पूर्णिमा या फिर गौतम बुद्ध जयंती के रूप में मनाया जाता है, जिसकी बौद्ध धर्म के लोगों के साथ-साथ हिंदू धर्म में भी विशेष मान्यता है।

Q. बुद्ध जी का जन्म कब और कहा हुआ था?

Ans: गौतम बुद्ध का जन्म लगभग ढाई हजार साल पहले राजा शुद्धोधन के महल में हुआ था।

Q. बुद्ध जी का पत्नी का नाम क्या था?

Ans: बुद्ध जी का पत्नी का नाम यशोधरा था।

Q.बुद्ध जी का मृत्यु कब और कहा हुआ था?

Ans: गौतम बुद्ध की मृत्यु 80 साल की आयु में 483 ईस्वी पूर्व कुशीनारा में हुई थी।

इसे भी पड़े-

nv-author-image

Shambhavi Mishra

यह कानपुर, उत्तर प्रदेश की निवासी हैं। इन्होंने हिंदी साहित्य में परास्नातक किया हुआ है। इन्हें शिक्षा, बिज़नस से संबंधित विषयों पर काफी अनुभव है और इन्ही विषयों पर लेख लिखती है। Follow Her On Facebook - Click Here

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *