Hindi Varnamala | हिंदी वर्णमाला के स्वर और व्यंजन के भेद एवं वर्गीकरण

किसी भी भाषा के बारे में पूरी जानकारी रखने के लिए, सबसे पहले हमें उस भाषा के वर्णमाला के बारे में अच्छे से पता होना चाहिए।

अगर आप भी हिंदी भाषा के बारे में जानने में रुचि रखते हैं, तो आप बिल्कुल सही जगह पर आए हैं। क्योंकि इस website पर हम हिंदी भाषा से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को साझा करते रहते हैं। 

आज के इस लेख में हम आपको हिंदी वर्णमाला(hindi alphabet) की संपूर्ण जानकारी प्रदान करेंगे। इसलिए मेरा आपसे निवेदन है कि इस लेख को पूरा ध्यानपूर्वक पढ़ें।

हिंदी वर्णमाला किसे कहते हैं?

वर्णों को सही तरीके से या व्यवस्थित ढंग से रखने के समूह को वर्णमाला कहते हैं| हर भाषा की अपनी एक वर्णमाला होती है जिसकी मदद से कोई शब्द या वाक्य आसानी से लिखा जा सकता है| हिन्दी भाषा की भी अपनी एक वर्णमाला है जिसमें वर्णों की मदद से वाक्य बनाए जाते हैं| व्याकरण की दृष्टी से हिन्दी के वर्णों को दो भागों में बाँटा गया है| स्वर और व्यंजन हिन्दी वर्णों के दो भाग हैं और इन्हीं पर हिन्दी व्याकरण और भाषा टिकी हुई है

स्वर और व्यंजन में आने वाले वर्ण निम्नलिखित हैं –
स्वर के वर्ण – अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ, अं, अ:, ऑ
व्यंजन के वर्ण – व्यंजन के वर्णों को अलग – अलग वर्गों में विभाजित किया गया है जो निम्नलिखित हैं –
क वर्ग – क, ख, ग, घ, ङ (क़, ख़, ग़)
च वर्ग – च, छ, ज, झ, ञ (ज़)
ट वर्ग – ट, ठ, ड, ढ, ण, (ड़, ढ़)
त वर्ग – त, थ, द, ध, न
प वर्ग – प, फ, ब, भ, म (फ़)
य वर्ग – य, र, ल, व, श, श़, ष, स, ह
संयुक्त व्यंजन – क्ष, त्र, ज्ञ, श्र

हिंदी वर्णमाला को कितने भागों में बांटा गया है।

hindi varnamala

हिंदी वर्णमाला को मुख्य रूप से दो भागो में बाँटा गया है, जिसमें स्वर एवं व्यंजन वर्णमाला के प्रमुख दो रूप हैं।

स्वर किसे कहते हैं?

जिस वर्ण का उच्चारण करते वक्त कंठ, तालु, साँस इत्यादि जगहों से बिना रुके या बिना किसी रुकावट के आवाज निकलती हो, वैसे वर्णों को स्वर्ग कहते हैं।
निम्नलिखित स्वर वर्ण के तीन भेद होते हैं –

  1. ह्रस्व स्वर – जिस स्वर वर्ण के उच्चारण में कम समय लगता है, उसे ह्रस्व स्वर कहते हैं| इसमें एक मात्रा के उच्चारण जितना समय लगता है| अ, इ, उ, ऋ ह्रस्व स्वर हैं| ह्रस्व स्वर को ही मूल स्वर कहा जाता है|
  2. दीर्घ स्वर – इन स्वर वर्णों के उच्चारण में अधिक समय लगता है इसीलिए इसे दीर्घ स्वर कहते हैं| यह स्वर स्वतंत्र हैं ना कि ह्रस्व स्वर का कोई रुप| आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ दीर्घ स्वर कहते हैं|
  3. प्लुत स्वर – इन स्वरों के उच्चारण करते वक्त दो मात्राओं से ज्यादा समय लगता है| लेकिन आधुनिक समय में इस स्वर का इस्तेमाल बिल्कुल ही कम हो गया है| व्याकरण के किताबों में भी अब इसका कोई विश्लेषण नहीं मिलता है|

लेखन के आधार पर स्वर: Hindi alphabet Swar Varn

अं
अ:

उच्चारण के आधार पर स्वर:

अ, आ , इ , ई , उ , ऊ , ए , ऐ , ओ , औ आदि

व्यंजन किसे कहते हैं?

जिस वर्ण का उच्चारण करते वक्त तालु, कण्ठ, साँस इत्यादि जगहों पर रुक कर आवाज निकलती है, वैसे वर्णों को व्यंजन कहते हैं। व्यंजन के हर वर्ण का उच्चारण स्वर के वर्णों की मदद से किया जाता है इसलिए व्याकरण में पूरे हिंदी वर्णमाला को दो भागों स्वर और व्यंजन में बाँटा गया है। व्यंजन को भी भागों में बताया गया है।

लेखन के आधार पर व्यंजन : Hindi alphabet Vyanjan Varn

क्ष त्रज्ञश्र

व्यंजन के प्रकार

स्पर्श व्यंजन: यह निम्नलिखित हैं।

क वर्ग : क , ख , ग , घ , ङ

च वर्ग : च , छ , ज , झ , ञ

ट वर्ग : ट , ठ , ड , ढ , ण ( जहां ड़ और ढ़ उत्क्षिप्त व्यंजन है)

त वर्ग : त , थ , द , ध , न

प वर्ग: प , फ , ब , भ , म

अंतस्थ व्यंजन : य , र , ल , व

उष्म व्यंजन: श , ष , स , ह,

संयुक्त व्यंजन: क्ष , त्र , ज्ञ , श्र

व्याकरण के आधार पर व्यंजन के दो प्रकार होते हैं जो निम्नलिखित हैं

  1. स्थान की दृष्टि से – व्यंजन के दो प्रमुख प्रकारों में स्थान की दृष्टि से देखे जाने वाले व्यंजन को प्रमुख चुना गया है, जो काफी महत्वपूर्ण है। यदि उच्चारण कण्ठ, मूर्धा, तालु इत्यादि से हो तो इन जगहों को उस वर्ण क स्थान कहते हैं|
  2. प्रयत्न की दृष्टि से – स्थान की दृष्टि से चुने जाने वाले व्यंजनों के बारे में तो हमने बता दिया लेकिन अब हम आपको बताने वाले हैं कि पर्यटन की दृष्टि से व्यंजन के प्रकार किस तरह से है। उच्चारण करते वक्त साँस में कम्पन या मात्रा इत्यादि द्वारा स्वास की प्रक्रिया हो तो उसे प्रयत्न कहते हैं|

व्यंजन के अलगअलग वर्णों के उच्चारण के लिए हमारे मुँह का अलग- अलग भाग प्रयोग में लाया जाता है| जैसे कि –
क वर्ग के उच्चारण के लिए कण्ठ का प्रयोग किया जाता है इसीलिए इसे कण्ठय कहा जाता है|
च वर्ग को तालव्य, ट वर्ग को मूर्धन्य, त वर्ग को दन्त्य, प वर्ग को ओष्ठय, अंतस्थ व्यंजन मतलब य वर्ग को अंतस्थ: और श, ष, स को सिबिलैंट या उष्म व्यंजन कहते हैं|
संयुक्त व्यंजन दो व्यंजनों के मेल से बनता है| जैसे –
क्ष = क् और ष् के मेल से बना है|
त्र = त् और र् के मेल से बना है|
ज्ञ = ज् और ञ् का मेल है|
श्र = श् और र् का मेल है|

हिंदी वर्णमाला में पंचमाक्षर यानी किसी भी वर्ग का पांचवा व्यंजन वर्ण आज के समय में बहुत ही कम इस्तेमाल किया जाता है। आज के आधुनिक समय में पंचम अक्षरों की जगह बिंदी का इस्तेमाल ज्यादा होता है। किसी भी भाषा की सबसे बड़ी इकाई वाक्य होती है,वाक्य के बाद उपवाक्य, उपवाक्य के बाद पदबंध और पदबंध से छोटी इकाई पद होती है| पद से छोटी इकाई अक्षर तथा अक्षर की छोटी इकाई ध्वनि होती है और हम ध्वनि को ही वर्ण कहते हैं।

हिन्दी वर्णमाला को कम्पन की दृष्टि से 2 भागों में विभाजित किया गया है – अघोष व्यंजन और सघोष व्यंजन|
अघोष व्यंजन: – अघोष व्यंजन में 13 वर्ण हैं, जिनमें मुख्य रुप से क, ख, च, छ, ट, ठ, त, थ, प, फ, श, ष, स को शामिल किया गया है।
सघोष व्यंजन: -अब बात करें सघोष व्यंजनों की तो सघोष व्यंजन में 31 वर्ण हैं – ग, घ, ज, झ, ञ, ड, ढ, ण, द, ध, न, ब, भ, म, य, र, ल, व, ह होते हैं|

यह तो प्राथमिक स्तर की कक्षाओं से ही बताया जाता है कि हिंदी भाषा की सबसे छोटी इकाई कौन सी है। लेकिन कई बार अधिक समय हो जाने पर यह याद नहीं रहता तो हम आपको बता दें कि हिंदी भाषा की वर्णमाला में सबसे छोटी इकाई ध्वनि है और वर्ण को ही ध्वनि कहते हैं| उच्चारण की दृष्टि से हिन्दी में वर्णों की संख्या 53 हैं जिसमें स्वर वर्ण की संख्या 12 और व्यंजन वर्ण की संख्या 41 है| लेखन की दृष्टि के आधार पर हिन्दी वर्णमाला में 52 वर्ण हैं जिसमें 21 स्वर, 42 व्यंजन और 4 संयुक्त व्यंजन की संख्या हैं|

स्वर वर्णों को स्वतंत्र रुप से बिना किसी अन्य वर्ण के मदद के बोला जाता है लेकिन व्यंजन को बोलने या लिखने के लिए स्वर वर्णों की सहायता लेनी पड़ती है| प्रत्येक व्यंजन के उच्चारण के लिए स्वर अ का इस्तेमाल होता है| स्वर अ के बिना किसी भी वर्ण क उच्चारण सही नहीं हो सकता| लेकिन कभी- कभी व्यंजन वर्णों को बिना स्वर की मदद से लिखने पड़ते हैं और उसके लिए व्यंजन वर्णों के नीचे हलन्त (्) की मात्रा लगानी पड़ती है|

हिंदी वर्णमाला के लिपि की बात करें तो कई लोग यह नहीं जानते कि हिंदी वर्णमाला के वर्णों को किस लिपि से लिखा जाता है। यदि आप इसके बारे में जानना चाहते हैं तो हम आपको बता दें कि हिन्दी वर्णमाला के वर्णों या अक्षरों को देवनागरी लिपि में लिखी जाती है| देवनागरी लिपि का इस्तेमाल मराठी, नेपाली, मैथिली, संस्कृत कई भाषाओं और उसके वर्णमाला में होती है|

किसी भी भाषा को लिखने में उसके हर एक वर्णों को एक सही तरिके और क्रम में रखा गया है जिसे सिधे शब्दों में वर्णमाला कहा जाता है| हिन्दी वर्णमाला या देवनागरी वर्णमाला के क्रम में सबसे पहले स्वर वर्णों की जगह है और उसके बाद व्यंजन वर्ण लिखे जाते हैं| उदाहरण के लिए –
अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ, अं, अ:, क, ख, ग, घ, च, छ, ज, झ और इसी तरह ट वर्ग, त वर्ग, प वर्ग, य वर्ग और श, ष, स|
ठीक इसी प्रकार रोमन या अंग्रेजी वर्णमाला में A, B, C, D, E, …….. , Z ही वर्णों का सही क्रम है|

भाषा में इस्तेमाल की जाने वाली ध्वनि या अक्षर का प्रतिनिधित्व करने के लिए वर्णमाला की जरुरत होती है| आधुनिक समय में लोग वर्णमाला के बिना भी अन्य तरीके जैसे शब्द- चिह्न, सिलैबरी इत्यादि का इस्तेमाल कर लिख कर अपनी बातें आसानी से समझा देते हैं| किसी भी भाषा का सबसे छोटा रुप वर्ण ही होता है इसीलिए वर्णों को खण्ड या टुकडों में विभाजीत नहीं किया जा सकता है|

किसी भी वर्णमाला में स्वर और व्यंजन दो ही प्रकार होते हैं लेकिन व्यंजन में स्वर वर्णों को जोड़ने के कई तरीके हैं| यदि आप जानना चाहते हैं कि व्यंजन में स्वर को जोड़ने के जिन तरीकों को शामिल किया गया है वह कौन-कौन से हैं तो बता दें कि इन्हीं तरीकों को व्याकरण के आधार पर तीन भागों में बाँटा गया है जो निम्नलिखित हैं –

  1. रूढी वर्णमाला –यह एक साधारण और आसान तरीका है| इसमें शब्दों को लिखने के लिए स्वर वर्ण को अलग- अलग ही लिखना पड़ता है| उदाहरण के लिए लागत शब्द को लआगअत लिखा जाएगा| इस तरीके में स्पष्ट रुप से स्वर वर्णों का इस्तेमाल देखा जा सकता है|
  2. आबूगिदा –इस तरीके में स्वर वर्णों के मात्रा की चिन्हों को अन्य व्यंजन के साथ जोड़कर शब्द बनाए जाते हैं| जैसे कि लागत शब्द को लआगअत ना लिख कर ल में आ की मात्रा और ग में अ की मात्रा लगा कर लागत लिख जाएगा|
  3. अबज़द –यह एक ऐसा तरीका है जिसमें ना तो स्वर सीधे व्यंजन में जुडते और ना ही उसकी मात्रा को जोड़ा को जाता है| इसे पढ़ने वालों को केवल शब्द देखकर ही अंदाजा लगाना होता है कि इस शब्द में कौन से स्वर वर्ण हैं| इस वर्ण का ज्यादा इस्तेमाल उर्दु और फ़ारसी लिपि में होती है|

अंग्रेजी में वर्णमाला को अल्फाबेट कहते हैं जिसमें A, B, C, D इत्यादि वर्ण होते हैं| अरबी, फ़ारसी के वर्ण. वर्णमाला को अलिफ़- बेई य अलिफ़- बे कहा जाता है|

लेखन के आधार पर हिन्दी वर्णमाला में कितने वर्ण हैं?

हिन्दी वर्णमाला में लेखन के आधार पर 57 वर्ण हैं| 12 स्वर, 41 व्यंजन और 4 संयुक्त व्यंजन वर्णों की संख्या है| अब तक हमने हिंदी वर्णमाला की विषय में संपूर्ण जानकारी उपलब्ध करवाई है। इसके साथ ही आगे हम आपको कुछ ऐसे प्रश्न तथा उत्तर बताने वाले हैं, जिसके माध्यम से आप हिंदी वर्णमाला को और भी बेहतर तरीके से समझ सकते हैं। इतना ही नहीं इसके अलावा आप इन प्रश्नों तथा उत्तरों के माध्यम से हिंदी वर्णमाला से संबंधित इसके इतिहास का संक्षिप्त वर्णन भी प्राप्त कर सकेंगे। यह निम्नलिखित है-

हिंदी वर्णमाला समंधित प्रश्न-उत्तर

हिन्दी वर्णमाला कैसे बनी?

युनानियों ने 800 इसा पूर्व फिनिशियन्स की वर्णमाला को समझा लेकिन उसमें व्यंजन की कमी थी इसीलिए उन्नीस फिनिशियन वर्ण और पाँच यूनानी वर्ण लेकर हिन्दी वर्णमाला का निर्माण किया गया|

हिन्दी वर्णमाला की लिपि क्या है?

देवनागरी लिपि में ही पूरी हिन्दी वर्णमाला लिखी गई है|

वर्णों क दूसरा नाम क्या है?

वर्णों का दूसरा नाम अक्षर है|

हिन्दी वर्णमाला के जनक कौन हैं?

जगदीप सिंह दांगी को हिन्दी वर्णमाला का जनक माना जाता है|

हिन्दी वर्णमाला में कितने स्वतंत्र अक्षर हैं?

हिन्दी वर्णमाला के सारे स्वर स्वतंत्र अक्षर हैं|

हिन्दी वर्णमाला में कितने वर्ग हैं?

हिंदी वर्णमाला में कुल पाँच वर्ग हैं|

हिन्दी वर्णमाला के वर्ग में कुल कितने अक्षर होते हैं?

हिन्दी वर्णमाला में कुल 25 अक्षर हैं|

मात्रा किसे कहते हैं?

स्वर के रुप को ही मात्रा कहते हैं|

हिन्दी वर्णमाला की खोज किस वर्ष में हुई?

1905 में इस खोज की शुरुआत हुई लेकिन 1995 में येल यूनिवर्सिटी के खोज के कारण लोग इसमें ज्यादा दिलचस्पी लेने लगे|

संस्कृत वर्णमाला में कुल कितने वर्ण होते हैं?

संस्कृत में वर्णों की संख्या पचास है|

हिंदी वर्णमाला के अंतर्गत मात्रा कितने प्रकार की होती है?

हिंदी वर्णमाला के अंतर्गत मात्रा के तीन प्रकार होते हैं|

गुरुमुखी लिपि में कितमे वर्ण होते हैं?

गुरुमुखी लिपि 35 वर्णों की होती है|

हिन्दी वर्णमाला के लेखक कौन हैं?

देवकी नन्दन खत्री द्वारा 1888 में हिन्दी वर्णमाला लिखी गई थी|

क से ह तक हिंदी वर्णमाला के अक्षर को क्या कहते हैं?

हिंदी भाषा में वर्णमाला के क से ह तक के अक्षर को व्यंजन कहते हैं।

हिंदी वर्णमाला का अंतिम वर्ण कौन सा है?

हिंदी वर्णमाला का अंतिम वर्ण ज्ञ है।

वर्णमाला को कितने भागों में बांटा गया है?

वर्णमाला को दो भागों में बांटा गया है- स्वर और व्यंजन ।

स्वर को कितने भागों में बांटा गया है?

स्वर को तिन भागों में बांटा गया है।

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