Indicator Basics in Hindi | इंडिकेटर क्या है, कैसे उपयोग करे ?

By | 30 October 2023

Indicator basic in hindi, इंडिकेटर क्या है, इइंडिकेटर का मतलब क्या है, इंडिकेटर कितने प्रकार के होते है?

शेयर मार्केट पर लोग दो तरीके से काम करके सफल हो पाते है। पहला हैं टेक्निकल एनालिसिस और दूसरा फंडामेंटल एनालिसिस। आपने कोई बार यह दोनो के बारे में सुना होगा। टेक्निकल एनालिसिस में ज्यादातर काम इंडिकेटर के काम होते है। आज इस आर्टिकल के जड़िए हम इंडिकेटर के बारे में ही पढ़ने वाले है।

किसी इंस्ट्रूमेंट के प्राइस निचे या ऊपर जायेगा , यह जानने के लिए आपको इंडिकेटर में मास्टरी करना पड़ेगा। इंडिकेटर आपको प्राइस के डायरेक्शन को अनुमान लगाने में मदत करते हैं। स्टॉक मार्केट में इंडिकेटर कोई तरह के होते है। लोग कोई सारे इंडिकेटर को एक साथ भी यूज़ करते है, जिससे ज्यादा confirmation ले सके।

इंडिकेटर क्या है? Indicator Basics in Hindi

Indicator Basics in Hindi

इंडिकेटर एक तरह के टूल है ,जो आपको कोई भी ब्रोकर अकाउंट प्रोवाइड करते है। कोई तरह के इंडिकेटर मार्किट पर उपलब्ध है , जिसे आप चार्ट पर लगा सकते हो। यह मार्केट के डायरेक्शन को समझने में मदत कर सकते है। आप सिंपल चार्ट पर जाकर इंडिकेटर सेक्शन से चार्ट पर इंसर्ट कर सकते हो।

इंडिकेटर का उपयोग क्या है?

टेक्निकल इंडिकेटर मार्केट के करेंट potential को बताते है। यह मार्केट के डायरेक्शन को बताते है। अगर आज मार्केट गिरने के संभावना है तो टेक्निकल इंडिकेटर से पहले ही इसके संकेत मिल जाते है।

मतलब टेक्निकल इंडिकेटर आपको यह इंडीकेट कर सकते है कि किस प्राइस पर जाकर मार्केट के मोमेंटम चेंज हो सकते है। टेक्निकल इंडिकेटर के साथ आप किसी भी स्टॉक पर सहीं एंट्री और exit ले सकते हो। राइट SL के लिए भी टेक्निकल इंडिकेटर बहुत अच्छा साबित होते है।

मार्केट में आज लगभग ९०% लोग टेक्निकल इंडिकेटर के प्रोयोग करना पसंद करते है।

इसके अलावा टेक्निकल इंडिकेटर मार्केट overvalued या undervalued यह भी बताते है।

Overvalued : मार्केट over value का मतलब है मार्केट ने आपने चरम सीमा पर है, जहा से एक करेक्शन कि जरूरत है। मतलब मार्केट थोड़ा नीचे आना है।

Under value: मार्केट अंदर वैल्यू के मतलब है मार्केट बहुत नीचे है , जहा से एक खरीदारी आना चाहिए। अंदर वैल्यू मार्केट में ही लोग स्टॉक को buy करके बहुत अच्छा रिटर्न बना पाते है।

टेक्निकल इंडिकेटर काम कैसे करते है?

सामान्यत इंडिकेटर एक तरह का mathematical calculation या गणितीय गणना है जो फॉर्मूला के आधार पर काम करते है। एक इंडिकेटर चार्ट में coding के द्वारा लगाया जाता है , जहा कोई तरह के फॉर्मूला के मदत कमांड दिया हुआ होता है। यह फॉर्मूला शेयर के प्राइस और वॉल्यूम के आधार पर लाइन को ड्रॉ करके buy/sell के सिग्नल बनाते हैं। जैसे जैसे शेयर प्राइस में चेंज होते है इंडिकेटर लाइन में भी चेंजेस होते रहते हैं।

एक टेक्निकल इंडिकेटर मार्केट के ट्रेंड , रिवर्सल को बता पाते है। जिसके साथ आप कब स्टॉक buy करना चाहिए और कब उससे exit लेना चाहिए, यह अनुमान कर सकते है। लेकिन ऐसा नहीं कि इंडिकेटर १००% राइट एंट्री और एग्जिट देते है। शेयर बाजार में कोई भी चीज १००% काम नही करता हैं।

अगर आप किसी एक इंडिकेटर पर मास्टरी कर लेते हो तो , आप विनिंग रेशियो को ७०-८०% तक ले जा सकते हो।

टेक्निकल इंडिकेटर कितने प्रकार के होते है?

वैसे कहा जाए तो मार्केट पर बहुत सारे इंडिकेटर मौजूद है , जिसे कोई ट्रेडर ने अपनी कुछ रूल और फॉर्मिला के उपयोग से बनाया है। इस आर्टिकल में हम सबसे ज्यादा पॉपुलर ५ इंडिकेटर के बारे में बताएंगे ।

  1. Moving Average
  2. RSI
  3. Bollinger Brand
  4. Super Trend
  5. Vwap

Moving Average : एक बिगिनर के सहा है यह मूविंग एवरेज । क्युकी मूविंग एवरेज सबसे ज्यादा आसान इंडिकेटर है क्युकी इसको समझना बहुत ही आसान होते है। लगभग हर कोई इस इंडिकेटर के उपयोग करना पसंद करते है। मूविंग एवरेज स्टॉक के average प्राइस को बताते है।

जैसे अगर आप tata motors के डेली चार्ट मैं मूविंग ऐवरेज लगाते हो जिसके वैल्यू आप ५० रखते हो, इसका मतलब कि आप पिछले ५० दिन की एवरेज प्राइस को देख सकते हो। अगर कुछ पॉपुलर मूविंग एवरेज के वैल्यू के बात करे वो है Moving average 200 (Daily chart) । यह सबसे पॉपुलर मूविंग एवरेज के वैल्यू है जो पिछले २०० दिन के एवरेज प्राइस को दिखाते है और इसका उपयोग बहुत सारे लोग करते है।

RSI : RSI यानी Relative strength indices यह स्टॉक की स्ट्रेंथ को कैलकुलेट करते है। इसके उपयोग से किसी भी स्टॉक की बड़ने या गिरने की मोमेंटम को माप सकते है। RSI में ० से १०० तक एक पैमाना होते है, जिससे आप मार्केट के ओवर बोट और ओवर सोल्ड एरिया को पता लगा सकते हो।

RSI १४ दिन के टाइम फ्रेम पर काम करते है , यह ट्रेडर को हेल्प करता है मार्केट के दिशा या मोमेंटम को समझने में। RSI के डिफॉल्ट सेटिंग में 30-70 के एक एरिया रहते है। जहा मार्केट 30 के नीचे चल रहे हो तो यह बताते है कि मार्केट ओवर सोल्ड पर खड़े है , जहा buy करना होता है और 70 के ऊपर है तो ओवर बोट area होते है जहा सेल करना होता है।

    Bollinger bands: यह तकनीकी इंडिकेटर है जो मार्केट में प्राइस के मोमेंटम को बहुत अच्छा से दिखाते है। Bollinger band एक तरह बैंड होते है जिसके अंदर ही ज्यादातर प्राइस के उतार चराब करते रहते है। इसमें 3 लाइन के प्रोयॉग होते है । upper band, lower band और मिडिल line। मिडल लाइन 20 मूविंग ऐवरेज के आधार पर बनते है।

    Bollinger band के प्रोयोग बहुत सारे लोग अपने अनुसार करते आए है। जैसे अगर अप्पर बैंड के पास प्राइस हो तो लोग वहा पर सेल करना पसंद करते है। वोही को लोअर बेंड buy का सिंगल देते है।

    Super Trend : Super Trend वो इंडिकेटर हैं जो ट्रेडर को ट्रेंड डायरेक्शन और ट्रेंड रिवर्सल के सिंगल देते है। यह इंडिकेटर पिछले दिन के हाई, लो और क्लोजिंग प्राइस के आधार पर काम करते है। सुपर ट्रेंड में दो कलर के लाइन होते है -Red और ग्रीन । मार्केट अगर ग्रीन लाइन के ऊपर है तो ट्रेडर इसके मतलब मार्केट बुलिस समझते है। वोही अगर मार्केट red लाइन के नीचे है तो यह बेयरिश को दर्शाते है। बहुत सारे ट्रेडर सुपर ट्रेंड को किसी दूसरे इंडिकेटर के साथ merge करके use करना पसंद करते है।

    VWAP इंडिकेटर: Vwap मतलब volume weighted Average price, यह भी एक बहुत ही पॉपुलर इंडिकेटर में से एक है। यह मार्केट के ट्रेंड और डायरेक्शन को दर्शाते हैं। यह इंडिकेटर व्लाउम के साथ साथ प्राइस के इंपोर्टेंस को भी कंसीडर करते है।

    Vwap आमतौर पर एक ट्रेडिंग डे के लिए कैलकुलेट किया जाता है और प्राइस एक्शन के साथ तुलना किया जाता है। Vwap के उपयोग ज्यादातर डे ट्रेडर करना पसंद करते हैं। साथ ही साथ monthly में भी इसका बहुत अच्छा उपयोग रहते है।

    Conclusion

    Indicator basics in Hindi इस पोस्ट में हमने इंडिकेटर क्या है और इसके उपयोगिता को समझा । लेकिन दोस्तो यह नहीं कि आप इंडिकेटर के ऊपर डिपेंड करके ट्रेड लेकर प्रॉफिट कर सकते हो। हर एक इंडिकेटर के जिस तरह उपयोगिता है उसी तरह का खामियां भी होते है। इसीलिए यह जरूरी है कि आप किसी भी इंडिकेटर पर काम करने से पहले यह जांच जरूर कर ले कि इसके रिजल्ट कैसा है।

    मार्केट पर हर चीज़े काम करते है, सिर्फ आपको उसपर मास्टरी करना होता है। साथ ही guys indicator को अगर आप प्राइस एक्शन के साथ उसे करते हो तो इसका रिजल्ट ओर भी अच्छे देखने को मिल सकते है।

    तो दोस्तो मुझे उम्मीद है इंडिकेटर पर बना यह आर्टिकल आपको पसंद आया होगा। इसपर अपना विचार कमेंट पर जरूर बताएं।

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