लिपि किसे कहते है- लिपि के कितने भेद होते है?

दुनिया में कई भाषाएँ हैं और सबको लिखने के अलग- अलग तरीके या ढंग होते हैं| उस तरीके को ही लिपि कहते हैं| इसके अलावा दूसरे शब्दों में कहें तो जिन चिन्हों क इस्तेमाल मौखिक ध्वनि को लिखने के लिए किया जाता है, उसे लिपि कहते हैं| लिपि के माध्यम से हम किसी भी भाषा को या किसी की बात को समझ कर या दूसरों को अपनी बात आसानी से समझा सकते हैं|

विभिन्न भाषाओं के प्रचलन के आधार पर दुनिया भर में हजारों भाषाएँ बोली जाती हैं लेकिन उन सभी भाषाओं को लिखने के लिए कुछ लिपियाँ ही हैं, जिनकी जानकारी सेे दुनिया की किसी भी भाषा को समझा जा सकता है|

लिपि की प्रमुख तीन परिवार या प्रकार का इस्तेमाल किया जाता है। लिपि के तीन प्रमुख प्रकारों की बात करें तो यह निम्नलिखित हैं –

  1. ब्रह्मी लिपि – ब्रह्मी लिपि, लिपि का एक ऐसा प्रकार है जो काफी पुरानी है जिसे दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया केे देशों में इस्तेमाल कई सालों से किया जाता है| इस लिपि के अंतर्गत देवनागरी, बंगाली, गुरुमुखी जैसी लिपियाँ हैं|
  1. चित्र लिपि – चित्र लिपि भी लिपि का एक महत्वपूर्ण प्रकार है। इस लिपि का इस्तेमाल सदियों से चीन, कोरिया और जापान जैसे देशों में प्रमुख रुप से किया जाता है|
  2. 3-फोनेशियन लिपि – ब्रह्मी एवं चित्र लिपि के अतिरिक्त लिपि के एक और महत्वपूर्ण प्रकारों में फोनेशियन लिपि शामिल है। यूरोप, अफ्रीका और मध्य एशिया के देशों में फोनेशियन लिपि का किया जाता है|

लिपि के भेद

जैसा कि हमने पहले ही बताया दुनिया में सभी भाषाओं की अपनी लिपि है| यूँ तो दुनिया भर में कई लिपियों क इस्तेमाल होता है लेकिन अपने की दृष्टि से कुछ लिपियों को अत्यधिक मान्यता दी गई है। कुछ मुख्य लिपियाँ व्याकरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, जिसे निम्नलिखित रूप से देखा जा सकता है।

  1. देवनागरी लिपि

भारत की प्रमुख और प्रसिद्ध लिपि देवनागरी है| हिन्दी भाषा के लिए देवनागरी लिपि का इस्तेमाल किया जाता है| इसका उपयोग ना केवल हिन्दी में बल्कि कई अन्य भाषाओं में भी होती है| संस्कृत, मराठी, नेपाली, गुजराती, भोजपुरी, संथाली इत्यादि भाषाओं को लिखने के लिए देवनागरी लिपि का प्रयोग किया जाता है| यह लिपि भारत की राष्ट्रलिपि है| देवनागरी लिपि बहुत ही पुरानी, साधारण और सुंदर और वैग्यानिकों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली लिपि है| इस लिपि क उदाहरण 8वीं शताब्दी के तेलुगु या कन्नड के स्तम्भ में देखा जा सकता है|

  1. फ़ारसी और अरबी लिपि

इन लिपियों का इस्तेमाल उर्दु भाषा को लिखने या समझने के लिए किया जाता है| उर्दु भाषा को समझने के लिए हमें फ़ारसी लिपि को समझना और जानना पड़ेगा| इस लिपि को ईरान या इराक के खड़ी राज्यों में देखा जा सकता है|

  1. रोमन लिपि

रोमन लिपि का इस्तेमाल ज्यादातर अंग्रेजी या जर्मन भाषा में होती है| रोमन लिपि के स्वर या व्यंजन को जानकर ही हम अंग्रेजी और जर्मन भाषा को आसानी से समझ सकते हैं|

  1. गुरुमुखी लिपि

यह गुरुमुखी लिपि पंजाबियों द्वारा इस्तेमाल की जाति है| गुरुमुखी लिपि का प्रयोग पंजाबी भाषाओं को लिखने के लिए किया जाता है| इस लिपि के जन्मदाता अंगद देव हैं|

  1. बंगला लिपि

भारत के कई राज्यों में हिंदी भाषा की तरह बंगला भाषा का विशेष महत्व एवं मान्यता है। बंगाली भाषा को लिखने और समझने के लिए बंगला लिपि का इस्तेमाल किया जाता है| इस लिपि में बंगाली स्वर और व्यंजन होते हैं| बांग्ला लिपि बंगालियों के लिए बहुत अधिक सहायक सिद्ध होती है।

  1. कानो लिपि

दुनिया भर में जापानी भाषा को समझने, जानने और लिखने के लिए कानो लिपि का इस्तेमाल किया जाता है| लिपि के विभिन्न प्रकार में इसका भी महत्वपूर्ण स्थान है।

  1. ब्रह्मी लिपि

भारत की सबसे प्राचीन और पुरानी लिपियों में से एक ब्रह्मी लिपि है| इसका प्रयोग प्राचीन समय से भारत में होता आ रहा है| अशोक के अभिलेखों में ब्रह्मी लिपि का इस्तेमाल और उदाहरण देखा जा सकता है|

  1. ब्रेल लिपि

ब्रेल लिपि की बात करें तो यह एक ऐसी लिपि है जो नेत्रहीनों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है| नेत्रहीन लोग इस लोपि के अक्षर को पढ़ने य लिखने के लिए इसे छूकर समझते हैं| आजकल इस लिपि का इस्तेमाल काफी ज्यादा होता है| इस लिपि के कारण ही कोई भी नेत्रहीन व्यक्ति बिना किसी के मदद के किसी भी सार्वजनिक स्थल पर अपना काम आसानी से कर सकते हैं| इस लिपि का आविष्कार लुई ब्रैल ने 1821 में किया था| यह लिपि कुल 12 बिन्दुओं पर ही आधारित है|

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FAQ :

लिपि को लेकर भारत की दृष्टिकोण क्या है?

उत्तर- भारत का दृष्टिकोण हमेशा से ही अध्यात्म के चारों ओर ही रहा है| इसीलिए भारत की प्राचीन लिपि ब्रह्मी लिपि को वर्णन करते हुए कहा जाता है कि यह लिपि स्वयं भगवान ब्रह्मा द्वारा रची गई है|

लिपि को लिखने की दिशा कैसी होती है?

उत्तर- कई लिपियाँ दाएँ से बाएँ और कुछ लिपियाँ बाएँ से दाएँ लिखी जाती हैं लेकिन कुछ ऐसी लिपियाँ भी हैं जिन्हें दोनों ही दिशाओं से लिख सकते हैं| कुछ लिपियों को लिखने का तरीका ऊपर से नीचे की ओर भी होता है|

देवनागरी को दूसरी लिपियों में कैसे परिवर्तित करें?

उत्तर- देवनागरी को दूसरी लिपियों में आसानी से बदला जा सकता है| आइट्रान्स य कम्प्युटर की मदद से देवनागरी को अलग- अलग लिपियों में बदला जा सकता है|

देवनागरी को राष्ट्रलिपि के तौर पर कब अपनाया गया?

उत्तर- देवनागरी लिपि अन्य लिपियों में सबसे महत्वपूर्ण एवं पहले स्थान पर आती है। 8 अप्रैल 1900 ई. में देवनागरी को राष्ट्रलिपि पदवी मिली|

देवनागरी लिपि में कितने चिन्ह हैं?

उत्तर- देवनागरी में कुल 52 वर्ण हैं जिनमें 11 स्वर और बाकी व्यंजन हैं|

देवनागरी लिपि के अंतर्गत कौन- कौन सी भाषाएँ आती हैं?

उत्तर- देवनागरी लिपि में कई भाषाओं का संग्रह है। बात करें देवनागरी लिपि के अंतर्गत आने वाले भाषाओं की तो संस्कृत, हिन्दी, मराठी, कश्मीरी, सिन्धी, नागपुरी, मैथिली इत्यादि भाषाएँ देवनागरी लिपि के अंतर्गत आती हैं|

भारत में कुल कितने लिपि मौजूद हैं?

उत्तर- भारत में कुल 22 लिपियाँ हैं, जिनका इस्तेमाल अलग- अलग भाषाओं को लिखने में प्रयोग किया जाता है|

लिपि और भाषा में क्या अंतर है?

उत्तर- किसी बात को समझाने के लिए शब्दों के समूह को भाषा कहते हैं लेकिन उस भाषा को अलग- अलग स्थानों और रवैए के कारण समझाने के लिए लिपि क इस्तेमाल किया जाता है|

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