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मंकीपॉक्स वायरस: लक्षण और बचने के उपाय (WHAT IS MONKEYPOX VIRUS, SYMPTOMS, AND HOW TO AVOID IT)

मंकीपॉक्स वायरस क्या है, लक्षण और बचने के उपाय (WHAT IS MONKEYPOX VIRUS, SYMPTOMS, AND HOW TO AVOID IT)

दोस्तो जैसा कि हम सब जानते ही है कि कोरोना वायरस ने फिर से आगमन किया है। कोरोना वायरस जहाँ एक तरफ चौथी बार पैर पसार रहा है वहीं पर अब एक नए वायरस ने दस्तक दी है जिसका नाम है मंकीपॉक्स वायरस। 

अभी हाल ही में मंकीपॉक्स (Monkeypox) का एक मरीज ब्रिटेन में मिला है और नाइजीरिया से लौटे एक व्यक्ति में मंकीपॉक्स वायरस (Monkeypox Virus) पाया गया है।

मंकीपॉक्स का पहला केस सबसे पहले साल 1970 में डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ़ कांगो (DRC) में मिला था। WHO के अनुसार अब तक चार महादेशों के 15 देशों में यह बीमारी पाई गयी है। 

आज के इस लेख में हम आपको मंकीपॉक्स वायरस क्या है, लक्षण और बचने के उपाय के बारे में पूरी जानकारी देंगे जिससे आप इस बीमारी से बच सकें।

मंकीपॉक्स वायरस (MONKEYPOX VIRUS) 

MONKEYPOX VIRUS In hindi

मंकीपॉक्स एक rare disease है जो infected जानवर से मनुष्यों में फैलती है। यह बीमारी भी कोरोना के तरह ही संक्रमित जीवों से मनुष्य में फैलती है। 

WHO की रिपोर्ट के अनुसार मंकीपॉक्स वाइरस गिलहरी, चूहों और कई तरह के बंदरों में पाया जाता है। 

मंकीपॉक्स वायरस क्या है? 

मंकीपॉक्स वायरस स्मॉलपॉक्स की तरह ही एक viral infection  है जो बंदरों और चूहों से इंसानों में फैलता है। अगर कोई जानवर इस वायरस से संक्रमित है और इंसान उसके संपर्क में आता है तो संभावना है कि उसके अन्दर भी ये मंकीपॉक्स वायरस आ जाएं और उसे भी मंकीपॉक्स बीमारी हो जाए। 

कैसा होता है मंकीपॉक्स वायरस और ये किस तरह फैलती है?

  • देखने में यह चेचक का बड़ा रूप लगता है तथा इसमें लगभग लक्षण भी चेचक जैसे ही होते हैं।
  • इसके साथ ही इसमें फ्लू जैसे लक्षण भी मरीज में दिखाई दे सकते हैं।
  • जिन मरीजों में ज्यादा संक्रमण होता है उनमें निमोनिया के लक्षण भी दिख सकते हैं। 
  • संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने के बाद यह बीमारी आंख, नाक या मुंह के जरिए दूसरे इंसान के शरीर में फैल सकती है।
  • संक्रमित व्यक्ति को छूने से, उसकी छींक या खांसी के संपर्क में आने से, संक्रमित व्यक्ति के मल के संपर्क में आने से, या फिर संक्रमित व्यक्ति की वस्तुओं को use करने से ये बीमारी spread हो सकती है।
  • मंकीपॉक्स एक प्रकार का वायरल इन्फेक्शन है जो ज्यादातर चूहों और बंदरों से इंसानों में फैलता है तथा  इंसानों का संक्रमित जानवरों के संपर्क में आने से मंकीपॉक्स  बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। 

क्या है मंकीपॉक्स वायरस कि पूरी जानकारी?

मंकीपॉक्स वायरस पोक्सविरिडे परिवार के ऑर्थोपॉक्सवायरस जीन्स के अंतर्गत आता है। 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, जूनोटिक रोग (zoonotic disease) मुख्य रूप से मध्य और पश्चिम अफ्रीका के tropical rainforest क्षेत्रों में होता है और कभी-कभी अन्य क्षेत्रों में पहुंच जाता है। 

वर्षावन चूहों या बंदरों जैसे संक्रमित जीवों से इंसानों में फैलने वाली इस बीमारी को मंकीपॉक्स  का नाम दिया गया है, जो कि  मंकीपॉक्स वायरस  की वजह से होता है।

  • इसमें वैरियोला वायरस भी होता है जिससे स्मॉल पॉक्स या छोटी चेचक की बीमारी होती है। चेचक की तुलना में मंकीपॉक्स कम गंभीर होते हैं।  
  • इसके लक्षण बहुत सामान्य होते हैं। इससे पीड़ित अधिकांश मरीज कुछ हफ्तों में ही ठीक हो जाते हैं, लेकिन कमजोर इम्युनिटी वाले व्यक्ति को निमोनिया की शिकायत भी हो सकती है और हालत गंभीर भी हो सकती है।

मंकीपॉक्स वायरस से जुड़ी जरूरी बातें –

WHO के अनुसार, मंकीपॉक्स  वायरस का इन्क्यूबेशन पीरियड (incubation period) अर्थात् संक्रमण से लक्षणों की शुरुआत तक का समय आमतौर पर 6 से 13 दिनों तक होता है, परन्तु कभी-कभी यह  5- 21 दिनों तक भी बढ़ सकता है। 

इंसानों के बीच कैसे फैलता है monkeypox virus?

मंकीपॉक्स वायरस बंदरों से इंसानों में फैली थी। इससे पीड़ित मरीज में फ्लू के लक्षण दिखाई देते हैं और त्वचा पर दाने निकल आते हैं जो स्मॉल पॉक्स जैसे दिखाई देते हैं। 

  • ये बीमारी infected person के पास आने से फैलती है।
  • ये वायरस फटी हुई त्वचा, श्वांस नली, आंख, नाक या मुंह के माध्यम से शरीर में पहुंचता है। 
  • इसके अलावा दूषित चीजों जैसे बिस्तर और कपड़ों के संपर्क में आने से भी फैलता है। 
  • WHO के कहे अनुसार ट्रांसमिशन ब्लड, शारीरिक तरल पदार्थ, या संक्रमित जानवरों के त्वचीय  घावों के सीधे संपर्क में आने से मंकीपॉक्स वायरस की संभावना हो सकती है। 
  • इसके अलावा अच्छे से न पका हुआ मांस और संक्रमित जानवरों के अन्य पशु उत्पादों को खाने से भी इस बीमारी की संभावना रहती है। 

इस बीमारी के लक्षण सामान्य और गंभीर दोनों हो सकते हैं। इसमें दाना चेहरे से शुरू होकर शरीर के अन्य भागों में फैलता है। इसे पूरी तरह ठीक होने में लगभग दो से चार हफ्तों का समय लग सकता है। इस दौरान घाव सख्त हो जाते हैं और काफी दर्द महसूस हो सकता है। इसका समय रहते इलाज न मिलने पर या immune system  कमजोर होने पर निमोनिया के लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं और स्थिति गंभीर भी हो सकती है। 

मंकीपॉक्स (Monkeypox ) का विस्तार जानवरों से इंसानों में तो होता है पर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक का संक्रमण अभी तक नहीं देखा गया है। Body fluid, skin sore, respiratory droplets और infected चीज़ों से भी infection spread हो सकता है। चेचक  के मुकाबले मंकीपॉक्स का infection कम  माना गया है।  

क्या है मंकीपॉक्स वाइरस के लक्षण ?

इसमें मरीज के चेहरे और शरीर पर लाल रंग के छोटे बड़े दानें और रैशेज के साथ ही और भी कई लक्षण दिखाई दे सकते हैं, जैसे-

  • body में लाल दने,
  • निमोनिया,
  • तेज सिरदर्द,
  • मांसपेशियों में दर्द,
  • ठंड लगना,
  • अत्यधिक थकान (fatigue) ,
  • तेज बुखार आना,
  • शरीर में सूजन,
  • energy में कमी होना,
  • त्वचा (skin) में लाल चकत्ते ,
  • धीरे धीरे लाल चकत्ते का घाव बन जाना,
  • लिम्फ नोड्स में सूजन,इत्यादि।

क्या है मंकीपॉक्स वायरस का इलाज ?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार इस वायरस का अभी तक कोई सटीक इलाज नहीं मिला है। 

इस वायरस से संक्रमित व्यक्ति को स्मॉलपॉक्स का टीका लगाया जाता है, जो इस बीमारी को रोकने में काफी हद तक मदद करता है साथ ही खतरा भी काफी कम हो जाता है।

वैसे तो इस बीमारी से ग्रसित व्यक्ति सामान्यतः एक या दो हफ्ते में ठीक हो जाता है लेकिन कुछ लोगों में यह बीमारी बहुत गंभीर और जानलेवा भी हो सकती है। इस बीमारी से संक्रमित होने पर मरीज के लक्षणों को कम करने के लिए इलाज भी किया जाता है।

इस बीमारी को रोकने के लिए smallpox vaccine, antiviral और वीआईजी का use किया  जा सकता है। 

कैसे कर सकते है मंकीपॉक्स  वायरस से बचाव? 

चिकनपॉक्स वायरस का अभी तक कोई सटीक इलाज नहीं मिल सका है। 

  • इससे बचने के लिए सबसे ज़रूरी है  जागरुकता। 
  • इससे बचने के लिए जानवरों के संपर्क में आने से बचना जरूरी है खासतौर पर बीमार जानवरों से बचें। 
  • इससे संक्रमित व्यक्ति को isolation  में रखा जाता है, जिससे किसी दूसरे को ये बीमारी न फैले। 
  • चेहरे पर मास्क का इस्तेमाल  करने और साफ-सफाई का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।
  • इसके अलावा हाथों को धोते रहने, सार्वजानिक जगहों पर फेस मास्क का इस्तेमाल करने और साफ-सफाई का ध्यान रखने से इस बीमारी से काफी हद तक बचा जा सकता है। 

FAQ:

Q. ये कैसे पता चलेगा कि हमें मंकीपॉक्स वायरस हो गया है?

Ans: समान्य तौर पर इसके monkeypox के symptoms जैसेपूरे शरीर पर गहरे लाल रंग के दाने, निमोनिया, तेज सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द इत्यादि होने पर संभावना है कि अपकी बॉडी में  मंकीपॉक्स वायरस आ गया है तथा  खुद को isolate करना ही समझदारी है।

Q. मंकीपॉक्स वायरस किस जानवर से फैलता है?

Ans: मंकीपॉक्स वायरस एक viral infection  है जो चूहों और विशेषकर बंदरों से इंसानों में फैल सकता है।

Q.कैसे बचा जा सकता है monekypox बीमारी से?

Ans: हालाकि अभी तक कोई proper treatment नहीं आया है लेकिन awareness  और isolation से इस बीमारी से बचा जा सकता है।

निष्कर्श(conclusion)

कोरोना महामारी का खतरा अभी टला भी नहीं है, अभी ये दुनिया कोरोना से उबर भी नहीं पायी है कि अब यूनाइटेड किंगडम से मंकीपॉक्स वायरस की ख़बर आ रही है जो कि जानवरों से फैलने वाली एक संक्रमक बीमारी है। 

स्मॉलपॉक्स या चेचक को तो टीके(vaccine) द्वारा पूरी दुनिया से साल 1980 में ख़त्म कर दिया गया था, लेकिन कई मध्य अफ्रीकी और पश्चिम अफ्रीकी देश में मंकीपॉक्स वायरस के केस अभी भी पाए जाते हैं।

आशा है ये लेख आप को मंकीपॉक्स वायरस  के बारे में awareness देगा तथा आपको बचाएगा।

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