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निबंध किसे कहते है, परिभाषा,विशेषता और प्रकार

निबंध किसे कहते है, परिभाषा,विशेषता और प्रकार , 50+ निबंध लिस्ट | Nibandh Kise Kahte hai , Important पर्व और त्यौहार के बारे में निबंध

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निबंध किसे कहते है: निबंध शब्द का निर्माण  नि+ बंध को जोड़ कर हुआ है। इसका शब्दिक अर्थ है जुड़ा हुआ या बंधा हुआ। निबंध में उपयोग की गई भाषा उसके विषय से पूरी तरह सम्बंधित होती है। अच्छी तथ्य पूर्ण भाषा एक निबंध की सम्पूर्ण ऊर्जा होती है। निबंध उसे लिखने वाले के व्यक्तित्व को दर्शाता है। निबंध में अपने भावों एवं विचारों को प्रभावशाली ढंग से व्यक्त किया जा सकता है।

nibandh

निबंध की परिभाषा

एक ऐसी गद्य रचना जिसमें किसी विषय का सीमित शब्दों में विस्तार से सार्थक वर्णन किया गया हो उसे निबंध कहते हैं। इस तरह की गद्य रचना द्वारा लेखक अपने विचारों को अधिक से अधिक प्रभावशाली ढंग से व्यक्त करने का प्रयास करते हैं। एक निबंध का सुसंगठित एवं व्यवस्थित होना आवश्यक है। और निबन्ध में उपयोग की गई भाषा का स्तर भी अच्छा होना चाहिए। 

एक ही विषय पर कई प्रकार से लिखे गए निबंध मिल सकते हैंज़ इसका कारण यह है कि प्रत्येक लेखक हर विषय पर अपने अलग विचार होते हैं एवं उन विचारों को व्यक्त करने का भी अपना अलग तरीका होता है। इसलिए प्रत्येक लेखक की अभिव्यक्ति भिन्न हो सकती है।

अच्छे निबंध की विशेषताएँ

अच्छे निबंध की रचना करने के लिए कुछ बातों को ध्यान में रखना आवश्यक होता है। यदि एक अच्छे निबंध की विशेषताओं को ध्यान में रखा जाए तो सहजता से ही निबंध की संरचना की जा सकती है।

● निबंध में प्रयोग की जाने वाली भाषा विषय के अनुरूप होनी चाहिए।

● निबंध जो भी विचार वर्णित हों उनमें तारतम्यता होनी चाहिए।

● जिस भी विषय पर निबंध लिखा जा रहा हो उसके हर एक पहलू पर चर्चा निबंध के अंतर्गत होनी चाहिए।

● यह हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि निबंध का अंतिम अनुच्छेद निबंध में संकलित बातों का सारांश हो।

● निबंध रचना में वर्तनी की शुद्धि अनिवार्य है,इसके साथ ही विराम चिन्हों का भी उचित स्थान पर प्रयोग होना चाहिए।

● निबंध लेखन में शब्द सीमा का भी पूरा ध्यान रखना आवश्यक है। यह बहुत अधिक विस्तृत नही होना चाहिए,संक्षिप्त रूप में ही मूल बात स्पष्ट होनी चाहिए।

निबंध के अंग

एक निबंध के मुख्य रूप से तीन अंग होते हैं, इन तीनों के मेल से ही सार्थक निबंध लिखा जा सकता है। 

*1) भूमिका -* निबंध की शुरुआत भूमिका से होती है। इसे प्रस्तावना एवं परिचय भी कहा जा सकता है। इस अनुच्छेद में निबंध के विषय का परिचय दिया जाता है। निबंध की भूमिका अथवा प्रस्तावना का आकर्षक होना आवश्यक होता है। इसे ही पढ़ कर मुख्य तौर पर पाठक आगे पढ़ने के लिए विचार बनाता है।

*2) विषय विस्तार-*  विषय विस्तार तीन से चार अनुच्छेद में लिखा जाता है। इसके अंतर्गत निबंध के विषय पर लेखक अपने विचार एवं अपने सुझाव प्रकट करता है। इसके अंतर्गत सम्मलित प्रत्येक पहलू पर लेखक द्वारा निबंध के विषय के हर एक जानकारी एवं पहलू को लिपिबद्ध किया जाता है।

*3) उपसंहार-* निबंध के सबसे अंतिम अनुच्छेद को उपसंहार कहा जाता है। उपसंहार के अंतर्गत पूरे निबंध में जो बात कही जाती है उसका सारांश लिखा जाता है। इसमें पूरे निबंध से प्राप्त होने वाले संदेश को भी सम्मलित किया जा सकता है। 

निबन्ध के प्रकार

विषय के आधार पर निबंध मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं।

1)वर्णात्मक निबंध-

जिस निबंध में किसी भी सजीव व्यक्ति या फिर निर्जीव वस्तु एवं पदार्थ को विषय रख कर के उसके बारे में वर्णन किया जाए उस निबंध को वर्णनात्मक निबंध कहा जाता है। ऐसे निबंधों में स्थान दृश्य परिस्थिति व्यक्ति एवं वस्तु को निबंध के विषय का आधार बना करके लिखा जाता है।

2) विवरणात्मक निबंध-

जो निबंध किसी ऐतिहासिक, पौराणिक या फिर अचानक घटी घटना पर लिखे जाते हैं उन्हें विवरणात्मक निबंध कहा जाता है। ऐसे निबंध किसी यात्रा, घटना, मैच, मेला आयोजन संस्मरण आदि को मुख्य विषय रखकर के लिखे जाते हैं।

3) विचारात्मक निबंध-

जिस निबंध में किसी के गुण, दोष , धर्म एवं फलसफा का वर्णन किया जाए उसे विचारात्मक निबंध कहा जाता है। इस तरह के निबंध किसी देखी या फिर सुनी हुई बात पर आधारित नहीं होते हैं। ना ही इस तरह का वर्णन इनमें मिलता है । इस तरह के निबंध को केवल कल्पना एवं चिंतन शक्ति के आधार पर ही लिखा जाता है । विचारात्मक निबंध लिखने के लिए अभ्यास की जरूरत होती है। ऐसे तरीके का निबंध अधिकत्तर आचार्य रामचंद्र शुक्ल, श्यामसुंदर दास एवं श्री हरि दामोदर आदि प्रबुद्ध लेखकों की लेखनी द्वारा लिखा गया।

प्रश्न- निबंध लेखन का उद्देश्य क्या होता है?

उत्तर-* निबंध लेखन का मुख्य उद्देश्य विचारों एवं मन की भावनाओं को एक सुसंगठित एवं सँवरा हुआ प्रदान करना होता है। सम्बंधित विषय पर अपने अनुभव एवं कल्पना के आधार पर रचनाकार एक चित्र खींचता है। और अपने मन के विचारों को निबंध के माध्यम से व्यक्त करता है।

प्रश्न- हिन्दी साहित्य के कहीं दो प्रबुद्ध निबंधकारों के नाम बताइये?

उत्तर- आचार्य रामचंद्र शुक्ल जी एवं श्याम सुंदर दास को हिंदी साहित्य का सबसे श्रेष्ठ निबंधकार माना जाता है।

प्रश्न- निबंध के अंग क्या-क्या होते हैं?

उत्तर- मुख्य रूप से निबंध के तीन अंग होते हैं।
1.भूमिका- भूमिका के अंतर्गत विषय का परिचय प्रदान किया जाता है। एवं उससे संबंधित जानकारी प्रदान की जाती है।
2.विषय विस्तार-* विषय विस्तार के अंतर्गत निबंध के विषय पर विस्तार से लेखके अपने विचार व्यक्त करता है। विषय विस्तार में 4 से 5 अनुच्छेद सम्मलित होते हैं। जिनमें विषय से संबंधित हर पहलू पर लेखक प्रकाश डालता है।
3.उपसंहार- निबंध के अंतिम अनुच्छेद को उपसंहार कहा जाता है। इसके अंतर्गत पूरे निबंध में कहीं गई बात को संक्षिप्त रूप में कह दिया जाता है। इसे सम्पूर्ण निबंध का सारांश समझा जा सकता है। कहीं कहीं उपसंहार को ही निष्कर्ष भी कहा जाता है।

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Shambhavi Mishra

यह कानपुर, उत्तर प्रदेश की निवासी हैं। इन्होंने हिंदी साहित्य में परास्नातक किया हुआ है। इन्हें शिक्षा, बिज़नस से संबंधित विषयों पर काफी अनुभव है और इन्ही विषयों पर लेख लिखती है। Follow Her On Facebook - Click Here