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विद्यालय पर निबंध | Vidhalaya in hindi essay

विद्यालय पर निबंध | Vidhalaya in hindi essay, School Par Nibandh

Vidhalaya in hindi essay

किसी भी व्यक्ति के जीवन में विद्यालय का बहुत अधिक महत्व होता है क्योंकि वह एकमात्र ऐसी जगह होती है जहां विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ अनुशासन, अच्छे व्यवहार के तौर तरीके और बड़े-छोटों के सम्मान की बात सिखाई जाती है। इसके साथ ही विद्यालय में शिक्षा का माहौल जन्म लेता है जो व्यक्ति को सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचाता है। हमारे देश भारत में भी विद्यालय और उसके महत्व का काफी ध्यान रखा गया है, जिसके लिए यहां की सरकार ने विद्यालय की आवश्यकता एवं सुविधाओं का पूरा ध्यान रखते हुए कई नियम और कानून बनाए हैं। उन्हीं नियमों के अनुसार भारत में सभी विद्यालय संचालित किए जाते हैं।

विद्यालय की परिकल्पना :

पढ़ाई या ज्ञान पाने के लिए विद्यालय का होना कोई नई सोच या नया विचार नहीं है बल्कि कई सदियों से हमारे देश में विद्यालय की परंपरा है। पहले समय में लोग विद्यालय को गुरुकुल कहकर पुकारते थे जहां सभी बच्चे ना केवल पढ़ाई बल्कि जिंदगी के उतार-चढ़ाव और जीने के तरीके, व्यवहार को भी सिखते थे। गुरुकुल में मौजूद गुरु अपने शिष्यों को अस्त्र शस्त्र और वेदों का भी ज्ञान देते थे। आज के समय में विद्यालय का भी यही काम है जहां शिक्षक अपने विद्यार्थियों को उनके कक्षा के अनुसार निर्धारित पाठ्यक्रम, व्यवहार, नैतिक शिक्षा और संपूर्ण विकास के बारे में सिखाते हैं।

विद्यालय के प्रकार :

विद्यालय मुख्य रूप से चार प्रकार के होते हैं, जिसमें पहला आंगनबाड़ी, दूसरा प्राथमिक विद्यालय, तीसरा माध्यमिक और चौथा उच्च माध्यमिक विद्यालय होता है। आंगनबाड़ी 5 साल से छोटे बच्चों के लिए होता है, जिसमें उन्हें बैठने, लिखने आदि सिखाए जाते हैं। वहीं प्राथमिक विद्यालय में कक्षा 1 से लेकर 4 तक की पढ़ाई होती है। माध्यमिक विद्यालय में कक्षा पांचवी से दसवीं तक की पढ़ाई होती है। जो उच्च माध्यमिक विद्यालय होते हैं, उसमें 11वीं और 12वीं की पढ़ाई भी करवाई जाती है।

विद्यालय के प्रधानाचार्य एवं अन्य शिक्षक :

किसी भी विद्यालय का संचालन प्रधानाध्यापक द्वारा किया जाता है। वही विद्यालय में सभी शिक्षक और विद्यार्थियों की गतिविधियों पर अपनी नजर रखते हैं। विद्यालयों में सभी विषय के लिए अलग-अलग शिक्षक भी मौजूद रहते हैं, जो विद्यार्थियों को विषय एवं पाठ्यक्रम से संबंधित जानकारी देते हैं। विद्यालयों में शिक्षक शिक्षिकाओं के अलावा कई ऑफिस स्टाफ भी होते हैं, जो विद्यालयों के देखरेख से संबंधित कार्यभार संभालते हैं।

विद्यालय का समय :

भारत सरकार द्वारा गर्मियों और सर्दियों के लिए विद्यालय का अलग-अलग समय निर्धारित किया गया है लेकिन वातावरण के अनुसार कई विद्यालय खुद के लिए एक समय निर्धारित कर सकते हैं। प्राथमिक विद्यालयों में सुबह के 6:30 से 7:30 बजे तक विद्यालय की शुरुआत हो जाती है और प्रार्थना करने के लिए 20 से 25 मिनट का समय निर्धारित किया जाता है। प्रार्थना करने के बाद सभी बच्चों की पढ़ाई शुरू होती है और करीब 4 से 5 घंटों की कक्षा करने के बाद सभी विद्यार्थियों की छुट्टी लगभग 12:00 और 1:00 बजे के बीच हो जाती है। वहीं माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों की बात करें तो यहां विद्यालय 10:30 बजे से शुरू होकर शाम 4:30 बजे तक चलती है।

विद्यालय में अनुशासन :

किसी भी विद्यालय के लिए शिक्षा के क्षेत्र में अनुशासन का विशेष महत्व है। अनुशासन के जरिए ही विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य तक पहुंचने में मदद मिलती है। यही कारण है कि प्रत्येक विद्यालय में अनुशासन को महत्व देते हुए इसका पालन किया जाता है। अनुशासन के द्वारा ही विद्यार्थी को अपने उत्तरदायित्व को निभाने की प्रेरणा मिलती है एवं उसे पूरा करने की शक्ति प्राप्त होती है।

विद्यालय के पाठ्यक्रम एवं गतिविधियां :

विद्यालय में सभी कक्षाओं के लिए अलग-अलग पाठ्यक्रम निर्धारित किए गए हैं। प्रत्येक राज्य के शिक्षा मंत्रालय द्वारा कक्षा के आधार पर पाठ्यक्रम तैयार किया जाता है एवं इसी के आधार पर कक्षा में पढ़ाई करवाई जाती है। 

विद्यार्थियों के मानसिक एवं शारीरिक विकास के साथ-साथ उनके मनोरंजन के लिए भी कई प्रकार की गतिविधियां विद्यालय के माध्यम से करवाई जाती है। इसके अंतर्गत तैराकी, फुटबॉल, शतरंज, एनसीसी, गायन, नाटक, नृत्य जैसी अन्य कलाएं और गतिविधियों के लिए भी विद्यालयों में पाठ्यक्रम तैयार किए जाते हैं, जिसमें विद्यार्थी अपनी रूचि और इच्छानुसार भाग लेकर ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं।

विद्यालय में शिक्षा :

विद्यालय में अध्ययन या शिक्षा के लिए अलग-अलग शिक्षकों द्वारा अलग-अलग तरीके अपनाए जाते हैं, जिसकी मदद से विद्यार्थियों को उनके विषय और पाठ्यक्रम को समझने में काफी आसानी भी होती है।

विद्यार्थियों में शिक्षा के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए बेहतरीन वातावरण का निर्माण किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को शिक्षा के माहौल से अवगत करवा कर विभिन्न क्षेत्रों में अग्रसर होने के लिए प्रेरित किया जाता है। यह उनके लिए सफलता की सीढ़ियों के रूप में कार्य करती है।

विद्यालय में राष्ट्रीय पर्व एवं अन्य समारोह :

विद्यालयों में राष्ट्रीय पर्व एवं अन्य समारोह भी मनाए जाते हैं, जिसमें उससे जुड़ी कहानी और उसका महत्व विद्यार्थियों को नृत्य, नाटक, भाषण या अन्य तरीकों से बताया जाता है। विद्यालय के शिक्षक राष्ट्रीय त्योहार या किसी अन्य समारोह जैसे कि बाल दिवस, खेल दिवस, वार्षिक समारोह जैसे मौकों पर सभी विद्यार्थियों को मीठा खिला कर खुशियां मनाना भी सिखाते हैं।

प्रत्येक विद्यालय में गणतंत्र दिवस एवं स्वतंत्रता दिवस भी काफी श्रद्धा पूर्वक मनाया जाता है, जो विद्यार्थियों को शहीदों के प्रति श्रद्धांजलि व्यक्त करना भी सिखाता है।

विद्यालय की सुविधाएं :

किसी भी विद्यालय में विद्यार्थियों के लिए कई तरह की सुविधाएं दी जाती है, जिसे पढ़ाई, खेलकूद या खाली समय में इस्तेमाल की जाती है। सभी विद्यालय में पुस्तकालय, कंप्यूटर लैब, खेल के मैदान, शौचालय, शुद्ध पानी की व्यवस्था, प्रयोगशाला, प्रशिक्षित शिक्षकों के गाइडेंस जैसे कई सुविधाएं मौजूद रहते हैं।

विद्यालयों में मौजूद इन सुविधाओं के माध्यम से विद्यार्थी शिक्षा के प्रति अधिक रुचि दिखाते हैं और एक से बढ़कर एक चीजें सीखते हैं। इनके माध्यम से विद्यार्थी टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी आगे बढ़ते हैं, जो उनके उज्जवल भविष्य के लिए मददगार होता है।

विद्यालय का कंप्यूटर लैब :

आज के आधुनिक समय में कंप्यूटर की शिक्षा होना बहुत जरूरी है इसलिए सभी विद्यालय विद्यार्थियों को एक कंप्यूटर लैब की सुविधा उपलब्ध कराते हैं जिसमें मौजूद कंप्यूटर की मदद से विद्यार्थियों को कंप्यूटर का ज्ञान दिया जाता है। किसी भी विद्यालय में कंप्यूटर लैब के संचालन के लिए एक प्रशिक्षित अध्यापक या अध्यापिका को नियुक्त किया जाता है। विद्यालय में मौजूद कंप्यूटर लैब में विद्यार्थियों को ना केवल कंप्यूटर के बारे में बताया जाता है बल्कि बताई हुई चीजों से जुड़ी परीक्षा भी हर हफ्ते ली जाती है।

प्राइवेट विद्यालयों में कंप्यूटर लैब की बहुत अच्छी सुविधा होती है लेकिन आज के समय में सरकारी विद्यालयों में भी कंप्यूटर लैब की व्यवस्था देखी जा रही है। यह सरकारी विद्यालयों में भी पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए बेहद मददगार साबित हुई है।

विद्यालय का पुस्तकालय :

प्राइवेट हो या सरकारी विद्यालय, सभी में एक पुस्तकालय की व्यवस्था जरूर होती है, जहां पाठ्यक्रम से संबंधित कई पुस्तकें रखी जाती है। इसके अलावा नैतिक शिक्षा की भी कई पुस्तकों को पुस्तकालय में रखा जाता है। विद्यालय में मौजूद पुस्तकालय में प्रतिदिन मैगजीन और अखबार आते हैं, जिसे सभी विद्यार्थी वहां मौजूद शिक्षक की अनुमति से पढ़ सकते हैं। 

पुस्तकालय में पाठ्यक्रम से जुड़ी भी कई सहायक किताबें भी मिलती है, जिसकी मदद से पाठ्यक्रम को समझना आसान हो सकता है। विद्यालय के पुस्तकालय से किसी भी किताब को अपने घर ले जाने के लिए वहां मौजूद शिक्षक की अनुमति लेनी होती है और साथ ही कुछ दिनों बाद उसे वापस भी करना होता है।

विद्यालय में खेल कूद का वातावरण :

प्रत्येक विद्यालय में खेलकूद के लिए एक मैदान अवश्य होता है। मैदान के चारों ओर पेड़ एवं फूलों के छोटे-छोटे पौधे लगे होते हैं। विद्यालय में खेलकूद करवाने के लिए शिक्षक की व्यवस्था भी होती है, जिनके द्वारा खेलकूद का समय निर्धारित किया जाता है एवं उस दौरान विद्यार्थी विभिन्न प्रकार के खेल खेलते हैं।

FAQs

1. प्रश्न :- अंग्रेजी भाषा में विद्यालय को क्या कहते हैं?

उत्तर :- अंग्रेजी भाषा में विद्यालय को School कहा जाता है।

2. प्रश्न :- विद्यालय कितने प्रकार के होते हैं?

उत्तर :- विद्यालय चार प्रकार के होते हैं जो निम्नलिखित हैं – आंगनवाड़ी, प्राथमिक, माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक।

3. प्रश्न :- विद्यालय के मुख्य काम क्या होते हैं?

उत्तर :- किसी भी विद्यार्थी का शारीरिक और मानसिक रूप से संपूर्ण विकास करना ही विद्यालय का मुख्य काम होता है।

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Shambhavi Mishra

यह कानपुर, उत्तर प्रदेश की निवासी हैं। इन्होंने हिंदी साहित्य में परास्नातक किया हुआ है। इन्हें शिक्षा, बिज़नस से संबंधित विषयों पर काफी अनुभव है और इन्ही विषयों पर लेख लिखती है। Follow Her On Facebook - Click Here

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