विश्व जनसंख्या दिवस निबंध,भाषण, नारे | World Population Day Essay in Hindi, Short Speech, Slogan, Theme 2021

विश्व जनसंख्या दिवस निबंध,भाषण, नारे (World Population Day Essay in Hindi, Short Speech, Theme 2021)

विश्व जनसंख्या दिवस 2021 का विषय है: “अधिकार और विकल्प इसका उत्तर हैं: चाहे बेबी बूम हो या बस्ट, प्रजनन दर में बदलाव का समाधान सभी लोगों के प्रजनन स्वास्थ्य और अधिकारों को प्राथमिकता देना है।”

World Population Day Essay in Hindi, Short Speech, Slogan, Theme 2021

दुनिया में जिस तरह से जनसंख्या बढ़ती जा रही है यहां उनके लिए हर बड़ी और विकट समस्या बाहर निकल कर सामने आती जा रही है। बढ़ती जनसंख्या पूरे मानव जाति को संकट में डाल दिया। बढ़ती जनसंख्या के कारण हमारे वातावरण में काफी प्रभाव पड़ा है। इसमें असंतुलित मौसम, ग्लोबल वार्मिंग दुनिया के लिए बहुत बड़ी चुनौती पूर्ण समस्या है। इस विकट समस्या को लेकर पूरे देश एकजुट होकर काम कर रहे हैं।

दुनिया की वर्तमान जनसंख्या लगभग कुल आठ अरब है। इसमें आधी जनसंख्या तो एशियाई क्षेत्र की ही हैं। अगर भारत और चीन को मिला दिया जाए तो पूरे विश्व में 40% आंकड़ा छू जाएगा। चीन ने अपनी बढ़ती जनसंख्या को रोकने के लिए कठोर कानून अपनाया है। चीन के सरकार ने एक सख्त कानून बनाया और सरकार द्वारा देश में कोई भी परिवार एक से ज्यादा बच्चा पैदा नहीं कर सकता है। जनसंख्या में वृद्धि कम हो इससे जनसंख्या तो कम हुए हैं पर चीनी बुड्ढा होने लगा। चीन सरकार द्वारा बनाया गया कानून टिक न पाया और जनसंख्या में वृद्धि होने लगा।

चीन की तरह ही भारत सरकार द्वारा नारा था कि हम दो और हमारे दो यह प्रचार टीवी, अखबार और दीवारों के माध्यम से किया गया था, ताकि लोगों में जागरूकता उत्पन्न हो। अशिक्षित होने के कारण इन नारों का कोई प्रभाव न पड़ा। 10 सालों में शिक्षा पर सुधार हुए और बढ़ती हुई जनसंख्या की ग्राफ पहले जो था अब वह ग्राफ नीचे आ गया।

विश्व जनसंख्या दिवस की शुरुआत

यह समस्या पूरी दुनिया के लिए सबक बना हुआ है। इन समस्याओं से बचने के लिए हमें एक या दो बच्चों को ही लेनी चाहिए। सरकार को भी इस पर कड़ी कार्रवाई बरतनी चाहिए । इसके प्रति कानून की कड़ी कोशिश होनी चाहिए।संयुक्त राष्ट्र ने 11 जुलाई 1987 को एक संगठन का निर्माण किया। ताकि सभी देश मिलकर इसके माध्यम से जन संख्याओं पर रोक लगाया सके। दिन प्रतिदिन जनसंख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है। यदि किसी परिवार में 25 से 30 सदस्य हैं, तो उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। पहले उनके परिवार में बेरोजगारी की समस्याओं का सामना करना पड़ता है और जो विशेषकर गरीब लोग होते हैं उनके लिए ज्यादा जनसंख्या जैसे मानो कोई श्राप है। उनके पास इतने पैसे नहीं है कि अपने बच्चों को अच्छे स्कूल में दाखिला करवाना या सही शिक्षा देना उनके बस में हो।

11 जुलाई सन 1987 ईस्वी में सारी दुनिया के सभी देशों में जनसंख्या की आंकड़ा लगभग 5 अरब से अधिक हो गई है। जिस तरह से जनसंख्या बढ़ती जा रही है ठिक उसी प्रकार बढ़ती समस्याओं का भी सामना करना पड़ रहा है। तमाम देशों के लोग एकजुट होकर जनसंख्या की खतरों से निपटने के लिए एक मंच पर आए हैं और 11 जुलाई को पूरे विश्व में जनसंख्या दिवस मनाने का निर्णय लिया गया ताकि जनसंख्या पर नियंत्रण कर सके।

विश्व जनसंख्या दिवस का इतिहास

शिक्षित ना होने के कारण पूरे विश्व में जनसंख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही थी। उन्हें इसकी कोई प्रवाह नहीं था। जनसंख्या बढ़ रही है उन्हें इन से कोई मतलब नहीं था अपने जैसा ही अशिक्षित बच्चों को बनाते थे उन्हें लगता था कि, इससे अच्छे ज्ञान का विकास होता था।

विश्व जनसंख्या दिवस मनाने का कारण

आज जनसंख्या की दृष्टि से भारत सवा सौ करोड़ आबादी वाले देश हैं। जनसंख्या की दृष्टि से विश्व में भारत का दूसरा स्थान है। जनसंख्या बढ़ने के कारण रोजगार ,शिक्षा, लालन-पालन यह सब पर काफी प्रभाव पड़ता है।आबादी बढ़ने के कारण आर्थिक पक्ष भी कमजोर हो जाती है।

जनसंख्या की दृष्टि से चीन प्रथम नंबर पर आते हैं। अगर जनसंख्या पर रोक लगाया जाए या जनसंख्या कम हो तो वहा का देश काफी विकसित होगा ओर बढ़ते जाएंगे। इसका मुख्य कारण यही है कि हमें जनसंख्या पर नियंत्रण करना होगा। इसलिए संयुक्त राष्ट्र ने बढ़ती हुई जनसंख्या पर कड़ा रुख अपनाया और पूरे देश से समर्थन मांगा की जनसंख्या पर कंट्रोल किया जाए तभी हमारा देश आगे बढ़ सकते हैं और बड़ी-बड़ी उपलब्धियों को हासिल कर सकते हैं।

विश्व जनसंख्या दिवस के उद्देश्य

इसका मुख्य उद्देश्य है हमें जनसंख्या पर नियंत्रण करना होगा। अगर हम जनसंख्या पर नियंत्रण कर ले तो अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा और अच्छे स्कूलों में, कॉलेजों में दाखिला करवा सकते हैं, ताकि उन्हें अच्छे ज्ञान हासिल हो। अगर पूरा विश्व शिक्षित से परिपक्व हो तो जनसंख्या आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है इसके साथ साथ पूरा देश पूरी तरह से विकसित होंगे और जो बेरोजगार हैं उन्हें रोजगार आसानी से मिल सकता है। अगर हम आंकड़ों की बात करें तो पूरे देश में 1 मिनट में 25 बच्चे पैदा होते हैं यह केवल अस्पतालों के रिकॉर्ड के अनुसार है। घरों में जो बच्चा पैदा होते हैं उन्हें जोड़ा नहीं गया है। वर्ष 1989 ईस्वी को संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के संचालक परिसद के द्वारा इसको प्रारंभ किया गया था, तथा लोगो के हितों के कारण इसे आगे बढ़ाया गया। जब वैश्विक जनसंख्या 11 जुलाई 1987 ईस्वी में लगभग 5 अरब (मिलियन) हो गई थी।

विश्व जनसंख्या दिवस के प्रति जागरूकता

2012 में विश्व जनसंख्या दिवस उत्सव की थीम (विषय) के द्वारा पूरे विश्व में यह संदेश प्रजनन संबंधी स्वास्थ्य के लिए सार्वभौमिक पहुंचाया गया था। जब पूरे विश्व की जनसंख्या लगभग 7,025,071,966 थी। लोगो के चिरस्थाई भविष्य के लिए ज्यादा छोटे और स्वस्थ समाज के लिए सत्ता द्वारा बड़े कदम उठाए गए थे। प्रजनन संबंधित स्वास्थ्य देखरेख की मांग तथा आपूर्ति को पूरी करने के लिए एक महत्वपूर्ण निवेश किया गया था। जनसंख्या घटाने के साथ ही गरीबी घटाने और स्वस्थ जीवन के लिए यह बहुत बड़ा कदम उठाया गया था।

यह विकास के लिए एक बहुत बड़ा कदम था, जब पृथ्वी पर वर्ष 2011 में मानव जनसंख्या लगभग 7 बिलियन के करीब पहुंच गई थी। वर्ष 1989 में संयुक्त राष्ट्र के संचालक कार्यक्रम परिषद एक फैसला किया कि, प्रत्येक वर्ष 11 जुलाई को वैश्विक तौर पर समुदाय द्वारा लोगों को सूचित करेंगे और आम लोगों के बीच जागरूकता बनाने के लिए इसे विश्व जनसंख्या दिवस के रूप में मनाना चाहिए तथा वास्तविक मुद्दे का सामना करने के लिए समाधान का पता करना चाहिए। बढ़ती जनसंख्या मुद्दे की ओर लोगों का ध्यान केंद्रित करने के लिए इसकी शुरुआत की गई थी

विश्व जनसंख्या दिवस की विकास

विश्व जनसंख्या दिवस की शुरुआत 11 जुलाई 1989 को संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम द्वारा किया गया था। उस वक्त विश्व की जनसंख्या लगभग 5 अरब थी। इस जनसंख्या को ध्यान रखते हुए 11 जुलाई को वर्ल्ड डे पॉपुलेशन मनाने का निश्चय किया गया था। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य यह भी था, कि हर नागरिक इस बात पर ध्यान दें और जनसंख्या नियंत्रण करने में अपना योगदान दें। इस दिन बढ़ती जनसंख्या के समाधान और इस ओर जागरूकता फैलाने के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर कई क्रियाकलाप किए जाते हैं। इसमें शैक्षणिक जानकारी, नीबंध लेखन प्रतियोगिता, पोस्टर वितरण, विभिन्न विषयों पर लोग प्रतियोगिता, सेमिनार शामिल है। इन क्रियाकलापों द्वारा परिवार नियोजन और गर्भ से जुड़ी तमाम जानकारी देकर लोगों को जागरूक किया जाता है।

भारत बढ़ती जनसंख्या के वृद्धि में कई देशों से बहुत आगे हैं। यह भारत के लिए बहुत ही चिंता का विषय है। आजादी के वक्त 1947 में भारत की आबादी 34.20 करोड़, थी जो कि अब बढ़कर एक अरब 25 करोड़ से भी ऊपर पहुंच चुकी है। भारत में दुनिया की 15 फीसद आबादी जाती है और भारत के पास विश्व का 2.4 परसेंट भूभाग है।इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जनसंख्या वृद्धि किस तरह एक विकराल रूप ले रही है।

प्रत्येक वर्ष यह दिन 11 जुलाई को लोगों के अधिकार के प्रचार के लिए एक उत्सव सा बन गया है और साथ ही परिवार के बेहतर तरीके से योजना बनाने में मदद करने के लिए मनाया जाता है। यह लोगों के बीच जागरूकता फैलाने के लिए घटनाओं, गतिविधियों और सूचनाओं का समर्थन करता है, ताकि वह अपने अधिकारों का ठीक तरह से उपयोग कर सकें और अपने परिवारों के लिए उचित निर्णय ले सकें।

हमारा संगठन पूरे शहर में उत्साह पूर्ण विश्व जनसंख्या उत्सव मनाने के रूप में प्रसिद्ध है। हमें यह बात बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि स्थानीय और साथ में राज्य सरकार ने भी हमें अपने परिवार के बारे में जागरूकता फैलाने परिवार नियोजन के बारे में बात करने के लिए प्रशंसा की है। इस बार हमारे पास अधिकारों और जिम्मेदारियों से अवगत कराने के अलावा अन्य व्यापक योजनाएं है। हम यहां कुछ बीमारियों के बारे में बात करेंगे जो, आपके परिवार के गैर नियोजन के कारण आक्रमण कर सकती है। हम सभी जानते हैं कि हमारे देश में अभी भी छोटी लड़कियों का विवाह करने का प्रचलन चल रहा है। विवाह के बाद बच्चे को जन्म देने का उम्मीद किया जाता है तथा वो लड़की को जन्म देती है, तो उनसे लड़के को जन्म देने की उम्मीद की जाती है।


यह प्रस्ताव तब तक चलता रहता है जब तक वह एक लड़के को जन्म नहीं देती है। दुर्भाग्य से हमारे देश में लिंग असमानता अभी भी एक मुख्य मुद्दा है। जिससे कि हमारे देश में जनसंख्या बढ़ती चली जाती है। लोगों को यह शायद ही कभी महसूस हो कि एक नाबालिक लड़की यदि गर्भवती हो गई, तो उसे कई बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है और अंत में उसके अपने स्वास्थ्य के साथ-साथ उसके गर्भ में पल रहे बच्चे को भी प्रभावित कर सकता है, जिसे वह जन्म देने वाली। कुपोषण एक ऐसे ही गर्भावस्था से जन्म देने वाले प्रमुख रोगो में से एक है।

उपसंहार

यदि 11 साल के बाद जब इन संख्याओं का रिकॉर्ड देखा जाए तो, उनके अनुसार 50 करोड़ और जनसंख्या बढ़ जाएगी, जो देश के लिए बोझ ही बन जाएगा । अधिक जनसंख्या के लिए अधिक जगह चाहिए, अधिक घर चाहिए । घर के लिए उन्हें जंगल काटना पड़ेगा जिससे इसे ऑक्सीजन की भी कमी होगी। इन सब समस्याओं को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र ने 11 जुलाई सन 1987 को जनसंख्या दिवस मनाने का ऐलान किया। सभी देशों को एक मंच पर बुलाए और बढ़ती हुई संख्याओं के बारे में निर्णय लेने के लिए कहा गया। सभी देश अपने-अपने कानून के तहत नियम बनाएं और और बढ़ती हुई जनसंख्याओं को कंट्रोल करने का निर्णय लिया। हम जनसंख्या पर काबू पा ले तो तभी हमारा देश आगे बढ़ेगा और नौजवानों को रोजगार मिल पाएगा।

विश्व जनसंख्या दिवस कब मनाया जाता है?

विश्व जनसंख्या दिवस 11 जुलाई को मनाया जाता है।

विश्व जनसंख्या दिवस की शुरूआत कब से हुई थी?

विश्व जनसंख्या दिवस की शुरूआत 11जुलाई 1989 को हुई थी।

विश्व जनसंख्या दिवस की शुरुआत किसके द्वारा किया गया था?

विश्व जनसंख्या दिवस सयुंक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम द्वारा हुआ था।

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