विश्व शरणार्थी दिवस पर निबंध | World Refugee day Essay/Theme 2021

विश्व शरणार्थी दिवस पर निबंध | World Refugee day Essay/Theme 2021

विश्व शरणार्थी दिवस पर निबंध: आज के समय में लोगों के पास रहने के लिए आवास एवं काम करने के लिए रोजगार हेतु सभी साधन उपलब्ध है। इसके अलावा देश की नागरिकता होने के कारण उन्हें सभी प्रकार की सुविधाएं भी प्राप्त होती रहती हैं। लेकिन यदि ऐसे समय में बात करें शरणार्थियों की तो न ही इन शरणार्थियों के पास नागरिकता है और न किसी भी प्रकार के राजनीतिक अधिकार प्राप्त हैं।

World Refugee day Essay 2021

शरणार्थी का अर्थ

शरणार्थी का शाब्दिक अर्थ है जो शरण में उपस्थित, असहाय, लाचार और निराश है। उन समूहों को ही शरणार्थी कहते हैं। उदाहरण स्वरूप भारत में शरणार्थियों का विश्व का सबसे बड़ा उदाहरण है। जब किसी अन्य देश से आए हुए कई लोग किसी गंभीर अथवा तनावपूर्ण परिस्थिति में अपने देश से अलग हो जाते हैं और किसी अन्य देश में सुरक्षित पहुंच जाते हैं, तब शरणार्थियों की समस्या शुरू होती है। अब अपनी रोजी चलाने के लिए वे आवास अथवा रोजगार की तलाश में दूसरे देश में रुक जाते हैं और उस देश की सरकार से वहां रहने एवं अन्य अधिकार की मांग करते हैं तो उसे शरणार्थी की श्रेणी में रखा जाता है। इस प्रकार दूसरे देश से उस व्यक्ति समूह को वहां रहने की मंजूरी मिल जाती है। कुछ समय बाद जब शरणार्थी वहां बसने लगते हैं तो सरकार से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय अधिकार की मांग करते हैं। वह मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के अधिकार की मांग करते हैं जिससे वह सुरक्षित रह सकें। पूरे विश्व में प्रतिवर्ष 20 जून को शरणार्थी दिवस के रूप में मनाया जाता है।

भारत में शरणार्थियों की स्थिति

जब भारत विभाजन हुआ था उस समय पाकिस्तान में बसे पंजाब , सिंध आदि जगह से हजारों लाखों की संख्या में लोग शरणार्थियों के रूप में भारत के विभिन्न हिस्सों में आकर बस गए थे। विभाजन के समय जो भी शरणार्थी पाकिस्तान से आए थे उन्हें भारत में रहने का पूरा अधिकार था। यह कानूनी तौर पर निश्चित किया गया था। शरणार्थी उन लोगों की श्रेणी में शामिल लोग हैं, जिन्हें भारत पाक विभाजन के बाद भी आज तक पुनर्वास प्राप्त नहीं हुआ हो। वह इस मार को पीढ़ियों से झेलते हुए आ रहे हैं। खास तौर पर घर छोड़ने की वजह से युद्ध उत्पीड़न या प्राकृतिक आपदा से बचने के लिए लाखों लोगों को विभिन्न परेशानियों का सामना करना पड़ता है। विशेष रूप से देखा जाए तो इन्हीं कारणों से शरणार्थियों की समस्या भी बढ़ती जा रही है।

भारत में बसे कानूनी और गैर कानूनी शरणार्थी की जनसंख्या अन्य देशों की विकसित जनसंख्या से काफी ज्यादा थी। भारत के विभाजन के बाद और आजादी के बाद भी काफी शरणार्थी आए थे। लेकिन भारत के विभाजन के बाद जो शरणार्थी आए उनकी बातों को छोड़ दें और केवल आजादी के बाद आए शरणार्थियों की बात करें तो आंकड़ों के मुताबिक आजादी के बाद भी आने वाले शरणार्थियों की संख्या बहुत अधिक थी।

दूसरे उदाहरण में देख सकते हैं जो तिब्बत के शरणार्थी और बांग्लादेश से आए कानूनी गैरकानूनी शरणार्थी से जुड़े हैं। दुनिया के हर इंसान चाहते हैं कि अपना घर द्वार हो लेकिन सोचिए अगर घर होते हुए भी छिन जाए तो कैसा महसूस होता है। वर्तमान समय में पूरे विश्व में 4 करोड़ लोग बेघर हैं इनका दर्द वही चार करोड़ लोग ही समझ सकते है। शरणार्थियों की बात करें तो पूरे विश्व में 57% शरणार्थी हैं, जो मुख्य रुप से दक्षिण सूडान, अफगानिस्तान और सीरिया से आए हैं।

इसके अंतर्गत इराक से आने वाले शरणार्थियों की संख्या भी बहुत अधिक है क्योंकि इराक में होने वाले युद्ध के बाद कई लोग शरणार्थी के रूप में दूसरे देशों में भाग कर चले गए। बीते हुए 30 वर्षों के दौरान देखा गया कि इराक़ से जो लोग शरणार्थी के रूप में भागकर दूसरे देशों में चले गए हैं उनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इराक में रहने वाले लोगों के साथ जबरदस्ती कर उन्हें विस्थापित कराया गया था। इसके प्रमुख कारण इराक के खिलाफ अनुवर्ती प्रतिबंध, 1980 से 1988 के बीच ईरान-इराक युद्ध के दौरान कुर्द विद्रोहियों सहित संघर्ष, असुरक्षा और अमेरिकी आक्रमण आदि शामिल थे।

विश्व शरणार्थी दिवस के उद्देश्य

आज के समय में शरणार्थियों की बढ़ती हुई समस्या वैश्विक स्तर पर बड़ा रूप धारण कर रही है। यही कारण है कि वर्ष में विश्व शरणार्थी दिवस के रूप में भी मनाने का फैसला लिया गया। इसके अंतर्गत शरणार्थियों की समस्या से लोगों को जागरूक कराना एवं उनकी सहायता करना है। अंतरराष्ट्रीय विश्व शरणार्थी दिवस का उद्देश्य है लोगों को जागरूक करना, जिसके कारण दुनियाभर में लाखों करोड़ों लोग प्रभावित हैं। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार हर मिनट लगभग 25 लोगों को सुरक्षित जीवन यापन के लिए अपना सब कुछ पीछे छोड़ना पड़ता है। UNHCR की वार्षिक ग्लोबल ट्रेडर्स रिपोर्ट के अनुसार 19 जून 2018 में जानकारी दी गई थी। सन 2017 के अंत में दुनिया भर में 6 करोड़ 85 लाख लोगों को जबरन विस्थापित किया गया था। दिन के हर मिनट में 31 लोग विस्थापित होते हैं।

विश्व में 52% शरणार्थी और बच्चे हैं। ज्यादातर लोग विशाल विकसित देश से जुड़े हुए हैं। इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि शरणार्थी अपने पुनर्वास के लिए जो कोशिश कर रहे हैं, वह उनके लिए काफी नहीं है। यही कारण है कि आज भी शरणार्थियों की समस्या जारी है। इराकी शरणार्थियों की खास बात यह है कि इराकी शरणार्थियों ने किसी दूसरे देश में शिविर बनाने एवं वहां रहने के बजाए शहरी क्षेत्रों में निवास करने का फैसला लिया जिससे वह रोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं।

वास्तव में शरणार्थी कौन है?

संयुक्त राष्ट्र संघ 1951 में शरणार्थी सम्मेलन के अनुसार इस प्रश्न के उत्तर पर चर्चा की गई जिसके अनुसार पाया गया कि एक शरणार्थी वह है जो उसकी जाति, धर्म ,राष्ट्रीयता या राजनीति और उत्पीड़न के डर से अपने घर और देश से उन्हें भागना पड़ा था। इन कारणों से शरणार्थियों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। इसलिए संयुक्त राष्ट्र ने इस विषय को बड़ी गंभीरता से ली है।
20 जून को विश्व शरणार्थी दिवस(World Refigee Day) मनाने का निर्णय भी लिया है। संयुक्त राष्ट्र ने 4 दिसंबर 2000 ईस्वी को इस बात की घोषणा करते हुए कहा था कि विश्व शरणार्थी दिवस मनाने का प्रमुख उद्देश्य यह बताना है कि कोई भी इंसान अमान्य नहीं कहा जा सकता। चाहे वह किसी भी देश का क्यों ना हो, उसे अमान्य की संज्ञा देना उचित नहीं है। एकता के साथ साथ समन्वय की भावना को रखते हुए हमें सभी को मान्यता देनी चाहिए।

आमतौर पर संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूएन एचसीआर शरणार्थी जी की सहायता करती है। शरणार्थी की दिनचर्या बहुत ही दर्दनाक और मर्मस्पर्शी है। इनकी गाथाओं को सुनकर हमारे हृदय में बहुत तकलीफ पहुंचती है। हमें शरणार्थियों से कभी भी नीच और गलत नजरों से नहीं देखनी चाहिए। बस वह धर्म, जाति, ऊंच-नीच और राजनीतिक आदि से पीड़ित है।

शरणार्थियों के लिए सरकार एवं कानून

आज के समय में शरणार्थियों की समस्या वैसी ही बनी हुई है जैसे वर्षों पहले थी। शरणार्थी अस्थाई रूप से किसी भी स्थान पर रहकर रोजी रोजगार के लिए कोशिश कर रहे हैं। वैसे देखा जाए तो शरणार्थियों के लिए भी नियम कानून बने हुए हैं लेकिन इसका पालन नहीं होता है। इसके लिए राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार भी बनाए गए हैं। परंतु अक्सर देखा जाता है कि इसकी सुनवाई नहीं की जाती है एवं इस समस्या को नकार कर नजरअंदाज कर दिया जाता है। यहां तक कि सरकार की बात की जाए तो सरकार के साथ-साथ विभिन्न राजनीतिक पार्टी भी इस बात के लिए कोई प्रतिक्रिया नहीं दिखाते। कोई भी शरणार्थियों की समस्या सुनने के लिए तैयार नहीं है।

वैश्विक स्तर पर शरणार्थियों की स्थिति

संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा जारी किए गए रिपोर्ट के मुताबिक बताया गया कि शरणार्थियों की स्थिति वैश्विक स्तर पर लगातार बड़ी होती जा रही है। यही कारण है कि संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी इस समस्या का हल निकालने की बात रखी है। शरणार्थियों की समस्या को लेकर संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी चाहती है कि सभी देशों को उनके यहां रह रहे शरणार्थियों की समस्या को गंभीरता से लेनी होगी। इसके साथ ही उन्हें देश की नागरिकता दिलाने के साथ-साथ रोजगार एवं अन्य अधिकार भी उपलब्ध कराने होंगे।

कई बार शरणार्थियों के साथ शरणार्थी बनने के लिए जबरदस्ती की जाती है और उन्हें अपने देश से दूसरे देश में विस्थापित कराया जाता है। हालांकि उन्हें इस प्रकार से कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है लेकिन इसके बावजूद उन्हें इस दौर से गुजरना पड़ता है। हाल ही में 19 जून 2018 को यूएनएचसीआर की वार्षिक ग्लोबल ट्रेंड्स ने शरणार्थियों को लेकर रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के अनुसार आंकड़ों को ध्यान में रखकर बताया गया कि 2017 के अंतिम महीनों में 6 करोड़ 85 लाख लोगों को बलपूर्वक स्थापित किया गया। इस प्रकार आंकड़ों के मुताबिक यह भी देखा गया है कि विशेष रूप से विकासशील देशों में यह समस्याएं अधिक होती है।

उपसंहार

आज के समय में शरणार्थियों की समस्या वैश्विक स्तर पर एक बड़ी समस्या के रूप में उभरती जा रही है, जिसके लिए यह आवश्यक है कि प्रत्येक देश की सरकार शरणार्थियों को अपने देश में आश्रय दें। इसके अलावा उन्हें उन अधिकारों से भी अवगत न होने दें जो अधिकार उस देश के नागरिकों को मिलते हैं। केवल सरकार ही नहीं बल्कि शरणार्थियों के क्षेत्र विशेष में जिन राजनीतिक पार्टियों की सत्ता है उन्हें भी शरणार्थियों से जुड़े इन समस्याओं को लेकर आपस में विचार करने चाहिए एवं इस समस्या को खत्म करने के लिए हर संभव प्रयास करने चाहिए। सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बाद ही शरणार्थियों की यह समस्या पूर्ण रूप से खत्म हो सकती है। सरकार के साथ-साथ हमारा भी कर्तव्य होना चाहिए कि शरणार्थियों के प्रति हम भावनात्मक रूप से जुड़ सकें, ताकि उन्हें भी अनुकूल वातावरण उपलब्ध हो सके।

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