नेल्सन मंडेला का जीवन परिचय | Nelson Mandela Biography in hindi

नेल्सन मंडेला का जीवन परिचय: नेल्सन मंडेला का पूरा नाम नेल्सन रोलीह्लला मंडेला था। नेल्सन मंडेला दक्षिण अफ्रीका के प्रथम अश्वेत भूतपूर्व राष्ट्रपति थे। राष्ट्रपति बनने से पूर्व उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में सदियों से चल रही है रंगभेद नीति का विरोध करने वाली वाले अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस के अध्यक्ष रहे। उस समय विश्व में रंगभेद की नीति जोरों शोरों से चल रही थी, नेल्सन मंडेला ने इसका घोर विरोध किया।

जिस कारण इन्होंने 27 वर्ष रॉबेन द्वीप के कारागार में गुजारे, जहां उनको कोयला खनिक के रूप में काम भी करना पड़ा था। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी बल्कि इस नीति का विरोध करते रहे और अंत में रंगभेद नीति को समाप्त करने में सफल हुए। इसके पश्चात श्वेत सरकार से 1990 में हुए एक समझौते के बाद उन्होंने नए दक्षिण अफ्रीका का निर्माण किया तथा वे समूचे विश्व और विशेषकर दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद का विरोध करने के प्रतीक बन गए। इसी कारण संयुक्त राष्ट्र संघ ने उनके जन्मदिन को विश्व भर में नेल्सन मंडेला अंतरराष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया। नेल्सन मंडेला 18 जुलाई 1918 से 5 दिसम्बर 2013 तक दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति रहे।

नेल्सन मंडेला का जीवन परिचय

जन्म 18 July 1918
जन्म स्थान Mvezo, South Africa
मृत्यु  5 December 2013
पत्नी Graça Machel
बच्चें Zindziswa Mandela, Zenani Mandela, More
अवार्ड Nobel Peace Prize, Bharat Ratna, Nishan-e-Pakistan,More

नेल्सन मंडेला का प्रारंभिक जीवन

Nelson Mandela Biography in hindi

नेल्सन मंडेला का जन्म 18 जुलाई 1918 ई. को म्वेजो, ईस्टर्न केप, दक्षिण अफ्रीका संघ में गेडला हेनरी म्फ़ाकेनिस्वा और उनकी तीसरी पत्नी नेक्यूफी नोसकेनी के यहाँ पर हुआ था। वे अपनी माँ नोसकेनी की प्रथम और पिता की सभी संतानों में 13 भाइयों में तीसरे थे। नेल्सन मंडेला के पिता हेनरी म्वेजो कस्बे के जनजातीय सरदार थे।
सरदार के बेटे को स्थानीय भाषा में ‘मंडेला’ भी कहते हैं जिस कारण इन्हें भी यह उपनाम प्राप्त हुआ। उनके पिता ने इन्हें ‘रोलिह्लाला’ प्रथम नाम दिया, जिसका अर्थ ‘उपद्रवी’ होता है। उनकी माता एक मेथोडिस्ट थी। नेल्सन मंडेला ने अपने प्रारंभिक पढ़ाई क्लार्कबेरी मिशनरी स्कूल से पूरी की, इसके बाद स्कूली शिक्षा इन्होंने मेथोडिस्ट मिशनरी स्कूल से की। जब नेल्सन मंडेला 12 वर्ष के थे तभी उनके पिता गुजर गए।

नेल्सन मंडेला का वैवाहिक जीवन

नेल्सन मंडेला ने तीन शादी किया था। इनसे मंडेला की 6 संताने भी हैं। मंडेला ने सबसे पहली शादी 1944 में अपने मित्र एवं सहयोगी वॉल्टन की बहन इवलिन के साथ शादी की। इसके बाद 1961 में इनपर एक देशद्रोह का मुकदमा चलाया गया, जो सरासर झूठ था और फिर अदालत ने इन्हें बाइज्जत बरी कर दी। इसी मुकदमे के दौरान एक दिन मंडेला की दूसरी पत्नी मिल गई और फिर 1961 में इन्होंने अपनी दूसरी शादी कर ली। मंडेला की दूसरी पत्नी का नाम नोमजामो विनी मेडीकीजाला था।

नेल्सन मंडेला का राजनीतिक जीवन

नेल्सन मंडेला एनसी यूथ लीग के संस्थापक हैं। 1943 ईस्वी में पहले वे नेशनल कांग्रेस कार्यकर्ता के रूप में शामिल हुए थे।1947 ईस्वी में नेशनल मंडेला का तलाक हो गया था, फिर उन्होंने वकालत पास की और अपने दोस्त ओलिवर टोंबो के साथ जोहानेसबर्ग में वकालत करने लगे।
कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए नेल्सन ने 1952 ईस्वी में कानूनी फर्म की स्थापना की। नेल्सन की बढ़ती लोकप्रियता के कारण उन पर प्रतिबंध लगा दिया गया और उन्हें किसी भी बैठक में भाग लेने की इजाजत नहीं दी गई। नेल्सन और आलिवार ने सरकार के दमन चक्र से बचने के लिए एक एम प्लान बनाया। एम का मतलब मंडेला से था। उन्होंने मिलकर रंगभेद के खिलाफ आवाज उठाई थी। उनके साथ साथ 155 कार्यकर्ताओं पर मुकदमा चलाया गया, जो कि 4 साल के बाद खत्म हुआ।

1958 में नेल्सन मंडेला की दूसरी पत्नी नेल्सन मंडेला को जेल से रिहा करवाई थी। एनसी पर प्रतिबंध लगाकर रोक दिया गया, जिसके कारण नेशनल मंडेला को भूमिगत होना पड़ा। उसके बाद नेशनल मंडेला ने अर्थव्यवस्था के लिए एक अभियान चलाया। इस कारण से उनके हिंसक का आरोप लगाया गया और उन्हें बंदी बना लिया गया। तब उन्होंने खुद के बचाव में स्वतंत्रता, प्रजातंत्र, समानता के रूप में अपने विचार व्यक्त किए, जिसका किसी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा और 1964 ईस्वी में नेल्सन मंडेला को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।

नेल्सन मंडेला के जेल में बिताए गए 27 साल

1964 ईस्वी से 1990 ईस्वी तक रंगभेद और अन्याय के खिलाफ लड़ाई के कारण उन्हें 27 साल जेल में बिताने पड़े। उन्हें जेल में रॉबेन द्वीप के कारागार में रखा गया था, जहां उन्हें कोयला खनिक का काम करना पड़ता था। इस दौरान उन्होंने गुप्त रूप से जेल में अपने जीवनी लिखी। उनकी यह जीवनी 1994 ईस्वी में पुस्तक में प्रकाशित हुई। इस पुस्तक का नाम “लोंग वॉक टू फ्रीडम” है।

नेशनल मंडेला को दक्षिण अफ्रीका में बड़े स्तर पर राष्ट्रपति के रूप में माना जाता था। वहां के लोग उन्हें प्रथम संस्थापक, राष्ट्रीय मुक्तिदाता और उधार कर्ता के रूप में मानते थे। 2004 ईस्वी में जोहांसबर्ग में स्थित सैंडटन स्क्वायर शॉपिंग सेंटर में नेल्सन मंडेला की मूर्ति स्थापित की गई थी और उस सेंटर का नाम बदलकर नेल्सन मंडेला सेंटर रख दिया गया। दक्षिण अफ्रीका के लोग उन्हें मदी कहकर बुलाते थे, जो बुजुर्गों के लिए एक सम्मान सूचक शब्द है।

जेल से रिहाई के बाद बने वे पहले अश्वेत राष्ट्रपति

11 फरवरी 1990 ईस्वी को 27 साल कारागार में बिताने के बाद उनकी रिहाई हुई। रिहाई के बाद उन्होंने समझौते और शांति की नीति पर लोकतांत्रिक एवं बहूजातीय अफ्रीका की नींव रखी । 1994 ईसवी में अफ्रीका में रंगभेद रहीत चुनाव हुए। अफ्रीका नेशनल कांग्रेस ने 62 प्रतीशत मत प्राप्त किया और बहुमत के साथ अपनी सरकार बनायी। 10 मई 1994 ईस्वी में मंडेला अपने देश के पहले अश्वेत राष्ट्रपति बने।

महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरित नेल्सन मंडेला

नेशनल मंडेला महात्मा गांधी के अहिंसा और असहयोग के विचारों से काफी प्रभावित हुए थे। वह अपने जीवन में गांधी के विचारों के विषय में सदैव चर्चा करते थे । 2007 ईस्वी में मंडेला ने अपने ऑडियो संदेश में कहा, दक्षिण अफ्रीका में शांतिपूर्ण बदलाव में गांधी के विचारधारा का बहुत बड़ा योगदान है। उनके सिद्धांतों के प्रभाव से ही दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद घृणित नीति के कारण जो समाज में गहरा भेदभाव था वह खत्म हो पाया।
नेल्सन मंडेला का विचार था कि विकास और शांति को अलग नहीं किया जा सकता है। 1933 में नेल्सन मंडेला को नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया था। उन्होंने कहा था विकास और शांति को अलग करना असंभव है। शांति और अंतराष्ट्रीय सुरक्षा के बिना कोई भी देश अपने गरीब और पिछड़े लोगों को मुख्यधारा में लाने के लिए कुछ नहीं कर सकता।

नेल्सन मंडेला का पुरस्कार एवं सम्मान

  • नेल्सन मंडेला को लोकतंत्र के प्रथम संस्थापक, राष्ट्रीय मुक्तिदाता और उधारकर्ता के रूप में देखा जाता है। दक्षिण अफ्रीका के लोग महात्मा गांधी की तरह नेल्सन मंडेला को भी राष्ट्रपति की दर्जा देते हैं।
  • 67 साल तक नेल्सन मंडेला को रंगभेद के आंदोलन से जुड़े रहने के उपलक्ष में लोगों से दिन के 24 घंटों में 67 मिनट तक दूसरों की मदद करने के लिए कहा गया था।
  • सन् 1933 ईस्वी में दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति फैब्रिक विलेम डी क्लार्क के साथ उन्हें भी संयुक्त रूप में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। मंडेला को विश्व के कई देशों और कई संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया गया। जैसे 1990 में भारत रत्न, 23 जुलाई 2008 में गांधी शांति पुरस्कार, निशान ए पाकिस्तान, ऑर्डर ऑफ लेनीन, प्रेसिडेंट मेडल ऑफ फ्रीडम इत्यादि।
  • 2004 ईस्वी में जोहानेसबर्ग में के स्थित सेंटर के नाम को बदलकर उनके नाम पर रख दिया गया।

नेल्सन मंडेला के विचार

  1. मैं जातिवाद से सक नफरत करता हूं। मुझे यह बर्बरता सी लगती है, चाहे वह स्वेत व्यक्ति से आ रही हो या अश्वेत व्यक्ति से।
  2. • लोगों को उनके निजी मानव अधिकार से अलग रखना उनके मानवता को चुनौती देने के बराबर है।
  3. बुद्धिमानी यह होती है कि लोगों को उनकी चीजें करने के लिए मना लिया जाए और उन्हें यह लगे कि वह उनकी मर्जी से हो रही हो।
  4. ऐसी कोई चीज नहीं है जो स्वतंत्र का हिस्सा ना बन सके।
  5. हम सदैव समय का सही इस्तेमाल करें और हमें यह सदैव पता होना चाहिए कि समय सही काम करने के लिए हमेशा तैयार रहता है।
  6. एक अच्छा नेता सही तरीके से और स्पष्ट रूप से बहस में शामिल होता है, क्योंकि उन्हें पता होता है कि वह और दूसरा पक्ष एक दूसरे के करीब होंगे।
  7. • जब कोई अच्छी बातें होती है विशेष कर, जब आपके जीत का जश्न मनाया जाता है, तब आपके लिए दूसरों को आगे रखकर पीछे से नेतृत्व करना बेहतर होगा। जब भी खतरा हो तो आपके आगे की लाइन में खड़े होना चाहिए, तभी लोग आपके नेतृत्व की सराहना करेंगे।
  8. मैंने यह सीखा कि साहस डर का अभाव नहीं था, बल्कि यह विजय थी। बहादुर आदमी वह नहीं है जो डर को महसूस नहीं करता, बल्कि वह है जो उस डर को भी जीत ले।

नेल्सन मंडेला की मृत्यु

दक्षिण अफ्रीका के प्रथम अश्वेत राष्ट्रपति नेशनल मंडेला के मृत्यु 5 जुलाई 2013 को फेफड़ों में संक्रमण होने के कारण होटन, जोहांसबर्ग में स्थित अपने घर में हुई। सर्वप्रथम राष्ट्रपति जैकब जुमा ने उनकी मृत्यु की घोषणा की थी। उनके देहांत के समय उनका उम्र 95 वर्ष था और उस समय उनके परिवार उनके साथ थे। आज भले ही नेल्सन मंडेला हमारे बीच नहीं रहे हैं लेकिन उनकी जीवन की महागाथा पूरे विश्व को प्रेरणा देने के लिए जीवित है। उन्होंने स्वतंत्र समाज की कल्पना की थी जहां पर सभी लोग शांति से एक साथ मिलजुल कर रह सके।

नेल्सन मंडेला का कहना था कि हमारा डर यदि हमारी चेहरे पर दिख जाता है तो यह हमारे हार का प्रतीक होता है। साहस के लिए हमें अपने चेहरे पर कभी भी डर नहीं दिखानी चाहिए। उन्होंने कहा कि मैं आजादी के साथ पैदा हुआ था । अपने मां के घर के सामने पगडंडियों पर दौड़ते हुए मुझे लगता था कि मैं आजाद हूं। अपने गांव के पशुओं को चराते हुए मुझे आजादी सा महसूस होता था। लेकिन हमें कहां पता था कि वह आजादी एक छलावा था, और संघर्ष करना ही हमारी नियति थी।

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